वह भी एक दौर था
अतीत की स्मृतियों में अभी भी ताजा है वो सब– मेरी उम्र की पूरी जमात हंसी-खुशी स्कूल जाती थी, टाट पट्टी में बैठती थी कलम और दवात से तख्ती पर लिखती थी और स्लेट पर खड़िया से आड़ी-तिरछी लक... Read more
नये ट्रैफिक नियमों के बाद चौराहे पर काबिलियत दिखाने को लालायित हैं पुलिस वाले
आज चौराहों पर बडी हलचल है. पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और उनके सहयोगी होमगार्ड वाले मुस्तैदी से तैनात हैं. ऐसा नहीं है कि ये पहले तैनात नहीं होते थे पर अब ऐसा लगता है सरकार ने इनको परमाणु हथि... Read more
पर्वतों की रानी मसूरी का इतिहास
मसूरी पहला हिल स्टेशन था, जहां स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था की गई. वेल्स बंदोबस्त के बाद सन् 1842 के नियम 10 के तहत इस क्षेत्र के नियमन के लिए एक स्थानीय समिति का गठन किया गया. अंग्रेजों के आ... Read more
गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की कविता: जहाँ न पटरी माथा फोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहाँ न बस्ता कंधा तोड़े, ऐसा हो स्कूल हमाराजहाँ न पटरी माथा फोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा जहाँ न अक्षर कान उखाड़ें, ऐसा हो स्कूल हमाराजहाँ न भाषा जख़्म उभारे, ऐसा हो स्कूल हमारा जहाँ अंक सच-सच ब... Read more
इस बात से सभी इत्तेफाक रखते हैं कि आज के दिन अगर कोई अपना बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ा रहा है तो वह मज़बूरी में पढ़ा रहा है. यह बात उत्तराखंड समेत पूरे भारत में लागू होती है. आज के दिन सरकारी स्... Read more
उत्तराखण्ड में स्थित अल्मोड़ा जनपद का पश्चिमी सीमावर्ती इलाका सल्ट कहलाता है. तीखे ढलान वाले रुखे-सूखे पहाड़, पानी की बेहद कमी, लखौरी मिर्च की पैदावार और पशुधन के नाम पर हष्ट-पुष्ट बैल इस इल... Read more
अमीषा चौहान: एवरेस्ट समेत तीन महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियां फतह करने वाली उत्तराखण्ड की बेटी
कभी-कभी ऐसा लगता है कि जीवन में आप खुद को जिस मकसद के लिए तैयार कर रहे थे वह आपकी जिंदगी को मायने नहीं दे पायेगा. ऐसा सभी की जिंदगी में होता है लेकिन सालों की मेहनत को छोड़कर किसी नए गोल के... Read more
बात सन दो हज़ार पचास की
बात सन दो हज़ार पचास की है. ये वो समय था जब युवा विभिन्न वीडियो साइट्स पर डालने के लिये अपने वीडियो बनाते रहते थे,और फुर्सत मिलते ही फुलकी/पानीपूरी, मोमोज़ का ठेला लगा लेते थे. बाकी अधिकांश... Read more
भारतीय भाषाओं के शीर्षस्थ कथाकारों का समागम : ‘कलकत्ता कथा समारोह, 1982’ : जब भारतीय भाषाओं का नेतृत्व हिंदी करती थी -बटरोही आज सब कुछ कितना बदल गया है! आज बिना अंग्रेजी के सभी भारतीय भाषाओं... Read more
धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय का बगेट-आर्ट
नगरपालिका सभागार में अल्मोड़ा 2-3 सितम्बर को आयोजित बगेट-आर्ट प्रदर्शनी देखने का सुअवसर मिला. बगेट चीड़ के पेड़ की छाल को कहते हैं. अल्मोड़ा के त्युनरा/बांसभीड़ा मोहल्ले के निवासी धीरेन्द्र क... Read more


























