जन्मदिन पर गिर्दा की याद
गिर्दा एक खूबसूरत आदमी थे. उम्दा कोनों, सतहों, गहराइयों-उठानों वाला तराशा हुआ गंभीर चेहरा और आलीशान जुल्फें. और बात करने का ऐसा अंदाज कि जैसे खुद मीर तकी मीर कह रहे हों: (Remembering Girda t... Read more
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – बाइसवीं किस्त पिछली क़िस्त का लिंक: दुनिया में पोर्नोग्राफी पूरी तरह खत्म होनी चाहिए किताबों और फाइलों का हम लड़कियों/स्त्रियों की जिंदगी में सिर्फ पढ़ी... Read more
ट्रैफिक चालान से कैसे बचें
चालान से बचने का सबसे पहला तरीका तो यही है कि गाड़ी घर से निकाली ही न जाए. गाड़ी घर से निकलेगी तो सड़कों पर चलेगी. सड़क पर चलेगी तो ड्राइवर को अपना बचपन याद आएगा. बचपन से ही लगभग सभी आम भारत... Read more
बयानों के जरिये सुर्खी बटोरने वाले केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अब बयान का गोला बी.एड करने वालों पर दाग दिया है. कुछ लोग सोच कर बोलते हैं, कुछ लोग बोलने के बाद स... Read more
पंडित गोविन्द वल्लभ पन्त के बचपन की तस्वीरें
बहुत कम लोग इस बात के जानते हैं कि पंडित गोविन्द वल्लभ पन्त का जन्म 30 अगस्त 1887 में अनंत चतुर्दशी के दिन हुआ था. 1946 में जब पन्त जी दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो अनंत चतुर्... Read more
‘हिमालय दिवस’ पर शमशेर सिंह बिष्ट की एक टिप्पणी
शमशेर सिंह बिष्ट ठेठ पहाड़ी थे. उत्तराखंड के पहाड़ी ग्राम्य जीवन का एक खुरदुरा, ठोस और स्थिर व्यक्तित्व. जल, जंगल और ज़मीन को किसी नारे या मुहावरे की तरह नहीं बल्कि एक प्रखर सच्चाई की तरह जी... Read more
इन दिनों एक गढ़वाली गीत पूरे देश में वायरल हो रहा है. इस गढ़वाली गीत पर न जाने कितने वीडियो बन चुके हैं. गीत के शुरुआती बोल हैं ‘फ्वां बाग रे’. वायरल हुआ गीत कुमाऊं के गीतकार पप्पू... Read more
हिमालय से पहले हिमालय में लोगों को बचाओ
आज अगर हिमालय बचा है तो यहां की महिलाओं की वजह से. हिमालय के पुरुषों ने हिमालय बचाने की जिम्मेदारी करीब एक पीढ़ी पहले ही छोड़ दी थी. भले ही आज हिमालय के पर्यावरणविदों में आप किसी महिला का नाम... Read more
खुद में ही पूरा बैंड हैं उत्तराखण्ड के दीप रजवार
रामनगर में रहने वाले युवा दीप रजवार एक वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर के तौर पर अच्छा नाम रखते हैं. कॉर्बेट पार्क से जुड़ी उनकी तस्वीरें विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं. फोटोग्राफर... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 46 (पिछली क़िस्त: मुझे जिंदा पाकर मां ने जब मुझ पर की थप्पड़ों की बरसात) एनसीसी से अपने संबंध के बारे में मैं बता ही चुका हूं. मैंने एनसीसी के कुल सात कैंप अटैंड किए. तीन... Read more


























