मैंने मुनस्यारी से 15 किमी दूर धापा गांव में सन् 1991 में जन्म लिया. तब गांव में न बिजली थी, न टीवी और न फोन. संस्कृति का मतलब फेसबुक में पोस्ट डालना या फोन में पहाड़ी गीत देखना नहीं था बल्क... Read more
खुश होना या दुखी होना हमारा चुनाव है
हमें खुश होना है या दुखी होना है, यह चुनाव हमेशा हमारे हाथ में रहता है. सामान्यत: हमें लगता है कि दुख या खुशी हमारे पास चलकर आते हैं. वे घटनाओं और सूचनाओं के जरिए हम पर आकर बरसते हैं. निस्सं... Read more
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भूलती सरकारें : बागेश्वर से 98 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम सिंह चौहान की बात
आजादी के बाद से ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान और शौर्य के नाम पर सरकारें हर साल 15 अगस्त को खूब वायदे करते आ रहे हैं लेकिन अब सरकारें उनकी बातें सुनना तो दूर उनकी सुध भी लेने में... Read more
कल है पहाड़ियों का लोकपर्व घ्यूं त्यार
कुमाऊं में भादों मास की संक्रांति घ्यूँ त्यार मनाया जाता है. इसे ‘ओलकिया’ या ‘ओलगी’ संक्रान्त भी कहते हैं. इस दिन घी खाने की परंपरा रही. इस कारण इसे घ्यूँ त्यार या घी... Read more
हमारी धरती में नायकों की कभी कमी नहीं रही. चाहे जितने गिना लीजिए. आजादी से पहले भी, और बाद में भी. इन नायकों का समर्पण भी याद करने लायक रहा है. मगर आजादी के तिहत्तर सालों के बाद उन्हें नाम स... Read more
देहरादून की पलटन बाज़ार का इतिहास
1803 ईसवी के अक्टूबर महिने में गोरखाओं ने देहरादून को अपने कब्जे में ले लिया था. राजा प्रद्युमन शाह ने मैदानी भाग में जाकर शरण ली. लंडोरा के गुर्जर राजा राम दयाल के साथ प्रद्युमन शाह के अच्छ... Read more
सुवा रे, ओ सुवा !बनखंडी रे सुवा.हरियो तेरो गात,पिंडलो तेरो ठूनाबनखंडी रे, सुवा !(Suhagin Story Shailesh Matiyani) काँसे की थाली में कमलावती बोज्यू रोली-अक्षत भिगो रही थीं और पद्मावती अपनी डब... Read more
सलाम त्रेपनदा! हरदम दिलों में रहोगे जिंदा
21 सितंबर 2014 को रविवार का वो दिन मेरे सांथ ही नागरिक मंच के सांथियों के लिए काफी चहल-पहल भरा था. साल में सितंबर के बाद महिने में किसी रविवार को मंच, अपने-अपने क्षेत्र में समाज के लिए निस्व... Read more
जनाज़े पर मिरे लिख देना यारो मुहब्बत करने वाला जा रहा है : राहत इंदौरी साहब को श्रद्धांजलि
यह सुनकर एकबारगी यकीन नहीं हुआ कि मोहब्बत के शायर राहत इन्दौरी दुनिया से रुख़सत हो गये. तकरीबन आधी सदी तक दिलों पर राज़ करने वाले अत्यंत मुखर, प्रेमी और अभिभावक की भूमिका में प्राय: आगाह करन... Read more
मुनस्यारी की ठंड में नए साल का स्वागत
आज हमें मुनस्यारी पहुंचना था. नाश्ता निपटाकर, दो दिनों का हिसाब-किताब कर धारचूला टीआरसी से हम निकल चले. कोहरे के कारण अभी मार्किट की दुकानें भी बंद ही थी. इक्का-दुक्का दुकान वाले अपना शटर उ... Read more


























