प्यारे शहर देहरादून का एक किस्सा
मेरे लिए यादों का एक शहर. कई वर्षों बाद आज यहां लौटना हुआ. इसे लौटना भी क्या कहूँ? बस ये वापसी कुछ दिनों की थी. कुछ काम निपटाकर फिर वापस लौट जाना था. आज की मुलाक़ातों का सिलसिला ख़त्म कर लौट... Read more
आज पारम्परिक पकवानों की सुंगध बिखरेगी पहाड़ों में
आज उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला है. आज की सुबह हरेला काटे जाने के बाद सबसे पहले अपने इष्टदेव के मंदिर में चढ़ता है साथ में चढ़ते हैं पारम्परिक पकवान. उसके बाद घर के बुजुर्ग हरेला लगाने के शुर... Read more
मित्र वही जो विपत्ति में काम आये
ज़रूरत में काम आने वाला दोस्त ही सच्चा दोस्त होता है इस मुहावरे का असली अर्थ सही मायनों में मुझे इस घटना के द्वारा ही पता चला. (Memoirs of Corbett Park by Deep Rajwa हुआ यूँ कि एक दिन जंगल स... Read more
ठुलदा की कहानी
आखिर गुजर गए 32, बड़ा बाज़ार, मल्लीताल के हमारे ठुलदा वर्ष 2013 में एक महत्त्वाकांक्षी योजना के रूप में मैंने अपनी नैनीताल की स्मृतियों पर केन्द्रित आत्मकथात्मक आख्यान ‘गर्भगृह में नैनीताल’... Read more
हरेले से एक दिन पहले कुमाऊँ अंचल में डिकारे पूजे जाते हैं. कुछ लोग पहले ही डिकारे तैयार कर लेते हैं और कुछ आज ही उन्हें बनाते हैं. हरेले से एक दिन पहले गौधूली के बाद डिकारे पूजे जाते हैं. इस... Read more
प्रिय अभिषेक की ‘लग्गू कथा’
“आप भी लिखते हो?” बाबूजी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए मुझसे कहा, जब मैंने उनको बताया कि मैं लिखता हूँ. मैं उनके सामने टेबिल के उस पार बैठा था. “हमारे साहब को पढ़ा है कभी?” उन्होंने पूछा.(Satir... Read more
हरेला लोकपर्व का पर्यावरण से संबंध
आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण सबंधित समस्याओं से जूझ रहा है. प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना मानव के जीवन को सुखी, समृद्ध व संतुलित बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण का विशेष महत्व है.... Read more
कहानी – पहाड़ की याद
जून के महीने की भरी दोपहरी. इतना भरा पूरा गांव आराम की मुद्रा में था. इसलिए चारों ओर खामोशी सी पसरी थी. इस खामोशी को अगर कभी-कभी तोड़ रहे थे तो वे तीन प्राणी थे— अम्बर, धरा और कालू नाम का भो... Read more
यशपाल शर्मा को श्रद्धांजलि
9 जून 1983 को भारत ने वर्ल्ड कप क्रिकेट का पहला मैच वेस्ट इंडीज के साथ खेला. इसके ठीक पहले हमारी टीम वेस्ट इंडीज में पांच टेस्टों की सीरीज में 0-2 से पिट कर आई थी. तीन वन डे भी खेले गए जिनमे... Read more
मेहनतकश पहाड़ियों के घट
मिट्टी-पत्थर-पेड़-घास-पानी-धारा-गूल से लिपटा पहाड़. तलाऊँ और उपराऊँ के सीढ़ीदार खेत. सेरे भी जहां साल में दो बार अन्न उगता. ऊँची पहाड़ियों से चूता-टपकता पानी, जो नीचे आने की ठौर में,कहीं धार... Read more


























