उत्तराखंड की जमीन और जमीर को बचा सकती है चकबंदी
इन दिनों उत्तराखंड की सामरिक और सामाजिक महत्त्व की भूमि को बचाने के लिए “विशेष भूमि कानून” की मांग की मुहिम सोशल मीडिया में चल रही है. यह एक जरूरी मुहिम है मगर उससे भी अधिक महत्व... Read more
कहानी : बाहर कुछ नहीं था
मेरा एक सीक्रेट है, जिसे मैं किसी से शेयर नहीं कर सकता. मुझे डर है कि जानते ही लोग मुझ पर हँसेंगे. दरअसल खुद मैंने इसे अभी अभी ईजाद किया है. तभी, जब पहलेपहल ऑफिस में यह खबर फैली कि कंपनी का... Read more
–मनीष आज़ाद परमाणु बम की प्रचंड ‘आग’ से अमेरिका में भी एक आदमी सालों झुलसता रहा. उसका नाम था- ‘क्लाड इथरली’ (Claude Eatherly). क्लाड इथरली 1945 में उस 90 सदस्यीय... Read more
हरि मृदुल की कहानी ‘कन्हैया’
वह विरल दृश्य था. सड़क पर एक युवक बांसुरी बजाता जा रहा था. सैकड़ों कान उसका पीछा कर रहे थे और मुग्ध हो रहे थे. पचासों आंखें उसे खोज रही थीं और व्याकुल लग रही थीं. जिस सड़क से वह गुजर रहा था... Read more
लोक गायिकाओं का समृद्ध इतिहास रहा है पहाड़ में
पहाड़ के लोक में महिला लोक गायिकाएं पहले भी रही हैं जिनमे कुछ ने संचार माध्यमों से प्रसिद्धि पाई तो कुछ ने गुमनामी में रहकर भी यहां के लोक को अपनी गायन कला से सजाने और संवारने का अद्भुत कार्... Read more
पिछले कुछ दिनों से सोशियल मीडिया पर उत्तराखंड के लिए एक सशक्त भू-कानून की मांग को लेकर एक कैम्पेन चलाया जा रहा है. अलग-अलग वीडियो, फोटो और पोस्ट के माध्यम से राज्य भर में अलग-अलग हिस्सों से... Read more
नैनीताल में साइकिल रिक्शा अब इतिहास की बात हुई
बीते दिन पर्यटन नगरी नैनीताल में ई-रिक्शे का संचालन शुरु हुआ. इसी के साथ नैनीताल में 175 सालों तक सवरियां ढोने वाला साईकिल रिक्शा इतिहास की बात हो गया. माल रोड में 2 आने से शुरू होकर 20 रूपय... Read more
अभी कुछ दिनों पहले की बात है सीताबनी मार्ग पर विचरण करने के दौरान मुझे एक नाले से मोर के बोलने की आवाज़ आयी, जो एक अलार्म कॉल थी. इसका मतलब था कि उसे कोई ऐसा मांसाहारी जीव नज़र आ गया था जो उ... Read more
अल्मोड़ा के ‘फूलों वाले पेड़’ की याद में
उसे फूलों वाला पेड़ कहा जाता था. पेड़ देवदार का था और उस पर लदे रहने वाले फूल बोगनवेलिया के. खिलने के मौसम में उसकी लकदक शब्दों के बयान से परे की चीज हुआ करती. (Almora Mall Road Bougain... Read more
हरेला पर लिखो और उपहार पाओ
दुनिया भर में आज तक किसी भी देश की मुख्य नीति में पर्यावरण कोई मुद्दा नहीं है वहीं उत्तराखंड का समाज साल में तीन बार पर्यावरण से जुड़ा हरेला लोकपर्व मनाता है. उत्तराखंड के समाज में मनाये जान... Read more


























