साधो, बीता साल गुज़र गया और नया साल शुरू हो गया. नए साल के शुरू में शुभकामना देने की परंपरा है. मैं तुम्हें शुभकामना देने में हिचकता हूँ. बात यह है साधो कि कोई शुभकामना अब कारगर नहीं होती. म... Read more
2 सप्ताह से सूखीढांग इंटर कॉलेज के भोजनमाता प्रकरण में आखिरकार शासन द्वारा दलित भोजन माता सुनीता देवी की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान कर दी गयी. सूखीढांग इंटर कॉलेज में सीईओ आरसी पुरोहित की अ... Read more
बोनस में प्राप्त ज़िन्दगी की नई सुबह
2022 का नया सवेरा इतिहास की एक नयी तहरीर लेकर मेरे सामने आकर खड़ा हो गया. यह नया सवेरा मेरे सामने क्यों हाज़िर हुआ? मुझे यह कोई सन्देश देना चाहता है, यादों का गुलदस्ता भेंट करना चाहता है, या... Read more
मैं अपनी वार्षिक परीक्षाएं पास करके घर में अपने ग्रीष्म अवकाश का आनंद ले रहा था. आखिर आनंद लिया भी क्यों ना जाए, पूरे वर्ष की माथा पच्ची के बाद किताबों और भारी-भरकम बस्ते से छुटकारा जो मिला.... Read more
पहाड़ चढ़ना जितना मुश्किल होता है, उस पर जिन्दगी बसर करना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता. जीवन की मूलभूत सुविधाओं की दुश्वारियों के दंश उन्हीं पाषाणों में पुष्प खिलाने के गुर भी उन्हें सिखात... Read more
वो सबके बीच चाचू नाम से जाने जाते हैं. उनके सामने पड़े रहते हैं लकड़ी के बेडौल टुकड़े जिन्हें वह जंगल जंगल से बटोर अपनी आँखों के सामने सहेज कर रख देते हैं.बेजान लकड़ियों का हर टुकड़ा इस उम्म... Read more
सीजन की पहली बर्फबारी के बाद मुनस्यारी
अपनी खूबसूरती और आबोहवा के चलते ही मुनस्यारी को ‘सार संसार एक मुनस्यार’ की उपमा भी दी जाती है. सार संसार एक मुनस्यार का मतलब है – सारे संसार की खूबसूरती एक तरफ और मुनस्यारी की खूबसूरती... Read more
बेहतर जीवन के लिए 2022 में लें ये 22 संकल्प
नया साल आपके दरवाजे पर दस्तक देने को है, लेकिन इधर कोरोना का एक नया स्वरूप ओमिक्रॉन भी सामने है. हालांकि अभी नए वेरिएंट ने सिर्फ भयभीत ही किया है, कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है. तमाम विषम परिस... Read more
लोक कथा : चाँद और सूरज आसमान में क्यों रहते हैं?
कई बरस पहले पानी और सूरज बहुत अच्छे दोस्त थे और दोनों ही धरती पर एक साथ रहा करते थे. सूरज अक्सर पानी से मुलाक़ात करने उसके घर ज़ाया करता लेकिन पानी कभी भी सूरज के घर उससे मिलने नहीं गया. आख़... Read more
डूबता शहर: टिहरी बांध बनने में शिल्पकार समाज के संघर्षों का रेखांकन करने वाला उपन्यास
साहित्यकार ‘बचन सिंह नेगी’ का मार्मिक उपन्यास ‘डूबता शहर’ “…शेरू भाई! यदि इस टिहरी को डूबना है तो ये लोग मकान क्यों बनाये जा रहे हैं. शेरू हंसा ‘चैतू! यही तो निन्यानवे का च... Read more


























