संभावना वर्सेस अपार संभावना
आपने ग़ौर किया होगा मुल्क में समय-समय पर कुछ चीज़ों की संभावना और किन्ही अन्य की अपार संभावना जताई जाती है. आइए हम भी संभावना और अपार संभावना के बीच अंतर को समझने का प्रयास करें. ऐंवैं ही…(A... Read more
डरपोक बाघ और चालाक सियार की कहानी
बड़ी पुरानी बात है जंगल के राजा बाघ और हाथी के बीच भयंकर लड़ाई हो गयी. 22 दिन 22 रात चली इस लड़ाई में बाघ मारा गया. बाघ के मारे जाने के बाद जंगल में कोई राजा न हुआ. बाघ की पत्नी अपने छोटे बच... Read more
नास्तिक : कुमाऊनी लोककथा
एक व्यक्ति ने एक सन्यासी से तीन सवाल पूछे. (kumaoni folklore Ivan Minayev) पहला सवाल था — आप ऐसा क्यों कहते हैं कि परमात्मा सर्वत्र व्याप्त है. मुझे तो वह दिखाई नहीं देता है. मुझे दिखाओ कि प... Read more
आज ही के दिन बना था ‘जिला पिथौरागढ़’
सालों पहले आज ही का दिन था जब देश और प्रदेश के नक्शे में पहली बार जिला पिथौरागढ़ का नाम दर्ज हुआ. 24 फरवरी 1960 से पहले पिथौरागढ़ जिला अल्मोड़ा की एक तहसील के रूप में एक मौजूद था. ऐतिहासिक द... Read more
कोट फट गया : नैनीताल का क़िस्सा
– अनिरुद्ध कुमार आठ बज रहे थे और नैनीताल की सर्दियों की रात शहर पर उतर चुकी थी. आप जानते ही हैं कि पहाड़ों की सर्दियों में हाल कैसा होता है. हर इंसान या तो रजाई में घुस चुका था या रजाई... Read more
बुद्धिमान मां और उसके बेवकूफ बेटे की कहानी
एक गांव में एक औरत और उसका बेटा पुरु रहता था. मां जितनी बुद्धिमान थी पुरु उतना ही नासमझ. जब पुरु बड़ा हुआ तो उसने अपनी मां से कहा कि वह धन कमाने के लिये शहर जाएगा. पहले तो पुरु की मां से उसे... Read more
मणिया: अमृता प्रीतम की कहानी
संध्या गहराने को थी, जब विद्या के पति जयदेव अपने काम से वापस आए और विद्या ने घर का दरवाज़ा खोलते हुए देखा, उनके साथ एक अजीब-सा दिखता आदमी था, बहुत मैला-सा बदन और गले में एक लंबा-सा कुर्ता पह... Read more
पहाड़ों को भी समझें अपना घर : रस्किन बॉन्ड
मैं पिछले छः दशकों से मसूरी में रह रहा हूँ. मसूरी में न होता तो शायद मैं इतना लिख भी नहीं पाता. सही मायनों में इन वादियों ने मेरे अन्दर के लेखक को बड़ा विस्तार दिया. मेरा जन्म कसौली में हुआ.... Read more
यूं बनाओ जिंदगी को सफलता की एक अजब दास्तां
मनुष्य के जीवन का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि स्थितियां कैसी भी हों, उनके सम्मुख हर पल संभावनाओं के द्वार खुले रहते हैं. कोई पियक्कड़ गई रात जरूरत से ज्यादा पी लेने के बाद सुबह तक गली में ही... Read more
कुछ लोगों का मानना है कि पिछले कुछ समय से पहाड़ के सरकारी स्कूलों में गढ़वाली और कुमाऊनी बोली सिखाने का ढकोसला चलाया जा रहा है. सोशियल मीडिया में लोग ऐसे लोगों की जमकर तारीफ़ भी करते हैं जो... Read more


























