सुल्ताना डाकू और कल्लू धोबी का गधा
सुल्ताना डाकू अमावस की रात डाका डालने आने वाला था. उसने चिठ्ठी लिखकर बताया था कि डाके के दौरान औरतों-बच्चों को हाथ नहीं लगाया जाएगा. बड़ों को भी नहीं बशर्ते वे सयाना बनने की कोशिश न करें. डा... Read more
पंचलैट: फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी
पिछले पन्द्रह दिनों से दंड-जुरमाने के पैसे जमा करके महतो टोली के पंचों ने पेट्रोमेक्स ख़रीदा है इस बार, रामनवमी के मेले में. गांव में सब मिलाकर आठ पंचायतें हैं. हरेक जाति की अलग-अलग सभाचट्टी... Read more
‘धूर्त सिपाही’ कुमाऊनी लोककथा
आहा तो हुआ जेठ के महीने की चटक धूप लगी हुई थी. सफ़र में निकला एक सिपाही भूखा और प्यासा एक घर में पहुंचा जहां एक महिला दिन का खाना बना रही थी. महिला का आदमी लकड़ी लेने जंगल गया हुआ था. सिपाही... Read more
1935 में जब टिहरी में पहला रेडियो आया
बात 1935 की है, रियासत टिहरी पर महाराजा नरेन्द्रशाह का शासन था. रियासत भर में महाराजा के पास ही एकमात्र रेडियो था. लेकिन इस रेडियो को साधारण नागरिक क्या, राज्य के उच्च अधिकारी भी न देख सकते... Read more
पहाड़ की सड़कों में विस्फोटक पर रोक
बरसों से पहाड़ में सड़क बनाने में रास्ते में आती चट्टानों की बाधा को दूर करने के लिए डायनामाइट का बेरोकटोक इस्तेमाल किया जाता रहा. इसके खतरे के प्रति नामचीन और पहाड़ के भूगर्भ की पड़ताल कर च... Read more
नशा : मुंशी प्रेमचंद की कहानी
ईश्वरी एक बड़े ज़मींदार का लड़का था और मैं एक ग़रीब क्लर्क का, जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न थी. हम दोनों में परस्पर बहसें होती रहती थीं. मैं ज़मींदारी की बुराई करता, उन्हें... Read more
हल्द्वानी के सिनेमाघरों का इतिहास
नगर से महानगर हो चुके हल्द्वानी ने अपने आसपास के गांवों को भी अपने में सम्मिलित कर लिया है. मुखानी क्षेत्र में पर्वतीय रामलीला कुछ दिनों तक आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी जो अब बंद हो चुकी है.... Read more
दलितों की बारात पहाड़ में पहले बिना डोला-पालकी की चलती थी और दूर से ही पहचानी जाती थी. किन्तु टिहरी-गढ़वाल जिले की ग्यारह गाँव पट्टी में ढुंग गाँव के दीपचन्द शाह ने अपनी शादी में डोला-पालकी... Read more
नया क़ानून: सआदत हसन मंटो की कहानी
मंगू कोचवान अपने अड्डे में बहुत अक़लमंद आदमी समझा जाता था. गो उस की तालीमी हैसियत सिफ़र के बराबर थी और उस ने कभी स्कूल का मुंह भी नहीं देखा था लेकिन इस के बावजूद उसे दुनियाभर की चीज़ों का इल... Read more
कोविड काल में उत्तराखण्ड ने जाति उत्पीड़न के मसलों के लिए भी देशव्यापी चर्चा बटोरी. कोविड की पहली लहर के दौरान नैनीताल के ओखलकांडा के एक क्वारंटाइन सेंटर में सवर्णों द्वारा दलित भोजन माता का... Read more


























