अल्मोड़े के आनसिंह जिन्होंने संस्कृत में कर्मकाण्ड की शुद्ध पुस्तकें छपवाकर उत्तराखंड के दुर्गम स्थानों तक पहुंचाई
‘आज इना तक सरकूँगा, कल भिन्हार तक, परसों सिलोर महादेव. अगले दिन भवड़ा, फिर रानीखेत. आठवें दिन अल्मोड़ा पहुँच पाऊँगा.’ कच्छप-गति से सरकने वाले उस विचित्र व्यक्ति ने बताया, आज से ल... Read more
रणनीति के अनुसार, हमारा बिग्रेड उत्तरी पहाड़ियों पर हमला करके, जहाँ इटली की सेना थी, पीछे से जाकर मौनेस्ट्री हिल की तोपों को शान्त करेगा और जर्मन सेना को रोम दिशा की मुख्य सेना से मिलाप न कर... Read more
उत्तराखंड की चंद्रप्रभा ऐतवाल ने अड़सठ साल की उम्र में फतह किया 6133 मीटर ऊँचा श्रीकंठ शिखर
हौंसले अगर बुलन्द हैं और लक्ष्य सामने हो तो किसी भी कार्य को करने में उम्र कहीं आड़े नहीं आती. भारतीय पर्वतारोहण संस्थान नई दिल्ली द्वारा महिलाओं की टीम का लीडर मुझे चुना गया, लक्ष्य था शिखर... Read more
बात 60 के दशक की है जब हम प्राईमरी स्कूल में तख्ती को छोड़कर कापी में लिखने का प्रयास करते-2 पॉंचवी कक्षा यानि तत्कालीन बोर्ड की क्लास में पहुँच चुके थे. तब बोर्ड की परीक्षा केवल विद्यार... Read more
जवाहर लाल नेहरू अल्मोड़ा जेल में
जवाहरलाल नेहरू (नवंबर 14, 1889 – मई 27, 1964) भारत की आजादी के शिल्पियों में से एक रहे नेहरू के बारे में आजकल एक धारणा फैलाई जा रही है कि ‘नेहरू ने भारत की आजादी के लिए किया ही क्... Read more
पूरे भारत में ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ का नारा बुलंद था देश की जनता के नेतृत्व में आज़ादी की अंतिम लड़ाई लड़ी जा रही रही. जब पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ़ लड़ रहा था तब टिहरी रियासत की जनत... Read more
पहाड़ में हर आम-ओ-ख़ास के कवि हैं शेरदा
शेरदा अनपढ़, उत्तराखण्ड के एक ऐसे कवि जिसे काव्यकर्म के लिए किसी पढ़ाई-लिखाई की जरूरत न थी. फिर भी समाज और परिवेश को पढ़ने में वो नम्बर वन थे. लोग उनकी पढ़ाई-लिखाई पर सवाल उठाएँ इससे पहले ही... Read more
जो दिन अपैट बतूँछी, वी मैं हूँ पैट हौ.जकैं मैं सौरास बतूँछी, वी म्यर मैत हौमायाक मारगाँठ आज, आफी आफी खुजि पड़ौ.दुनियल तराण लगै दे, फिरि ले हाथ है मुचि पड़ौ.जनूँ कैं मैंल एकबट्या, उनूँल मैं न... Read more
अल्मोड़ा में कठपुड़िया प्राइमरी पाठशाला के रतन मासाब जिनका तबादला गाँव वाले हमेशा रुकवा देते थे
मैं उन दिनों प्राइमरी पाठशाला कठपुड़िया में पड़ता था. स्कूल गया तो सीधे कक्षा दो में बैठ गया क्योंकि घनदा कक्षा दो में पड़ता था, हमउम्र था और कक्षा की समझ भी नहीं थी. इसलिये साथ बैठने की... Read more
उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के समय हम स्कूल में थे. आन्दोलन से जुड़ी एक ठोस याद एक ख़बर है – पिथौरागढ़ के एक छात्रनेता ने जिलाधिकारी ऑफिस के बाहर आत्मदाह कर लिया. करीब-करीब दस-पन्द्रह दिन तक इस... Read more


























