एक ही समय में धराली और स्विट्ज़रलैंड में हिमस्खलन या भूस्खलन की घटनाएं हुईं, लेकिन परिणाम बिल्कुल अलग रहे. उत्तराखंड के धराली क्षेत्र में आई आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया, लोगों को जान और संप... Read more
आजकल पहाड़ को समझना समय को उल्टा पढ़ना हो गया है. पिछले कुछ वर्षों से मैं यह समझने की कोशिश कर रही हूँ कि सदियों से फले फूले हमारे पर्वतीय समाज को अचानक “उजड़ता हुआ” क्यों कहा जाने लगा है. म... Read more
हिमालय को आमतौर पर बर्फ़, जंगल और हरियाली का प्रतीक माना जाता है, लेकिन एक नया वैज्ञानिक अध्ययन चेतावनी दे रहा है कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हरित आवरण धीरे-धीरे घट रहा है. बीते करीब द... Read more
कैसा था नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस?
नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस बीसवीं शताब्दी के शीत युद्ध काल की एक गंभीर और गोपनीय घटना से जुड़ा है. यह वह समय था जब परमाणु तकनीक का उपयोग राज्यों द्वारा ऊर्जा उत्पादन, वैज्ञानि... Read more
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में इंसान सबसे ज्यादा जिस चीज से दूर होता जा रहा है, वह है शांति. दिन भर की भागदौड़, काम का दबाव, आर्थिक चिंताएं और लगातार शोर हमारे मन को थका देता है.... Read more
क्या हैं जलवायु शरणार्थी?
हिमालय, पलायन और उत्तराखंड के भविष्य की चेतावनी पलायन कोई नया शब्द नहीं है; सभ्यताओं का इतिहास ही दरअसल मनुष्य के स्थानांतरण का इतिहास है; कभी भोजन की तलाश में, कभी सुरक्षा के... Read more
क्या चौड़ी सड़कें हिमालय के लिए बेहतर हैं?
हिमालय में रहना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन यह भी सच है कि यहाँ रहने वाले लोगों ने कभी इसे आसान बनाने की ज़िद नहीं की. उन्होंने पहाड़ को बदलने की बजाय खुद को उसके अनुसार ढाला. शायद इसी कार... Read more
आप कितना जानते हैं नैनीताल के भाबर की नदियों को
ब्रिटिश काल में तैयार किए गए गजेटियर स्थानीय भूगोल, इतिहास और संसाधनों का अद्भुत खजाना हैं. ये दस्तावेज उस जमाने की प्रशासनिक व्यवस्था और भौगोलिक समझ का प्रतिबिंब हैं. आज हम बात करेंगे... Read more
भारत-नेपाल संस्कृति की जीवनरेखा ‘काली नदी’
भारतीय संस्कृति और सभ्यता में नदियाँ सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि सभ्यताओं का आश्रय स्थल और धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्रों का गढ़ रही हैं. उत्तराखंड की पावन भूमि से देश की कई बड़ी नदियों का... Read more
हरियाली के पर्याय चाय बागान
चंपावत उत्तराखंड का एक छोटा सा नगर जो पहले अल्मोड़ा जिले का हिस्सा था और 1972 में पिथौरागढ़ में शामिल हुआ। फिर 1997 में एक स्वतंत्र जिला बन गया। गोरल देव यहां के इष्ट देवता है इसलिए यह गोल्... Read more


























