क्या हैं जलवायु शरणार्थी?
हिमालय, पलायन और उत्तराखंड के भविष्य की चेतावनी पलायन कोई नया शब्द नहीं है; सभ्यताओं का इतिहास ही दरअसल मनुष्य के स्थानांतरण का इतिहास है; कभी भोजन की तलाश में, कभी सुरक्षा के... Read more
क्या चौड़ी सड़कें हिमालय के लिए बेहतर हैं?
हिमालय में रहना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन यह भी सच है कि यहाँ रहने वाले लोगों ने कभी इसे आसान बनाने की ज़िद नहीं की. उन्होंने पहाड़ को बदलने की बजाय खुद को उसके अनुसार ढाला. शायद इसी कार... Read more
आप कितना जानते हैं नैनीताल के भाबर की नदियों को
ब्रिटिश काल में तैयार किए गए गजेटियर स्थानीय भूगोल, इतिहास और संसाधनों का अद्भुत खजाना हैं. ये दस्तावेज उस जमाने की प्रशासनिक व्यवस्था और भौगोलिक समझ का प्रतिबिंब हैं. आज हम बात करेंगे... Read more
भारत-नेपाल संस्कृति की जीवनरेखा ‘काली नदी’
भारतीय संस्कृति और सभ्यता में नदियाँ सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि सभ्यताओं का आश्रय स्थल और धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्रों का गढ़ रही हैं. उत्तराखंड की पावन भूमि से देश की कई बड़ी नदियों का... Read more
हरियाली के पर्याय चाय बागान
चंपावत उत्तराखंड का एक छोटा सा नगर जो पहले अल्मोड़ा जिले का हिस्सा था और 1972 में पिथौरागढ़ में शामिल हुआ। फिर 1997 में एक स्वतंत्र जिला बन गया। गोरल देव यहां के इष्ट देवता है इसलिए यह गोल्... Read more
हिमालयन बॉक्सवुड: हिमालय का गुमनाम पेड़
हरे-घने हिमालयी जंगलों में, कई लोगों की नजरों से दूर, एक छोटी लेकिन वृक्ष की बहुत महत्त्वपूर्ण प्रजाति पाई जाती है, जिसे Himalayan Boxwood (Scientific name: Buxus Wallichiana) कहते हैं... Read more
जिम कॉर्बेट और उनका जांबाज साथी ‘रॉबिन’
मशहूर शिकारी और पर्यावरणविद् जिम कॉर्बेट का नाम आते ही हमारे जेहन में कुमाऊं के घने जंगल और आदमखोर बाघों की कहानियां ख़ुद-ब-ख़ुद तैरने लगती हैं. कॉर्बेट के इन रोमांचक किस्सों का एक ऐसा अहम क... Read more
पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय और तराई-भाबर में खेती
उत्तराखंड की धरती पर कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विकास का एक चमकता सितारा है “गोविंद बल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय”, जिसे हम प्यार से पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के नाम... Read more
उत्तराखंड हिमवंत के देव वृक्ष पय्यां
कालिदास ने हिमालय को देवतुल कहा है. पुराणों में देवलोक की कल्पना भी हिमालय के कैलाश-मानसरोवर पथ के मध्य कहीं की है. देवताओं के कोषाध्यक्ष, कुबेर की नगरी अलकापुरी भी कैलाश के निकट ही बताई गई... Read more
कोसी नदी ‘कौशिकी’ की कहानी
इस पहाड़ से निकल उस पहाड़कभी गुमसुम सी कभी दहाड़यूं गिरते-उठते, चलते मिल समंदर से जाती हैहर नदी अपनी मंजिल यूं ही तो पाती है. जिस प्रकार शरीर में धमनियां हैं, ठीक उसी प्रकार प्रकृति में नदिय... Read more
























