ले गुड़ खा, साल भर सांप-कीड़े नहीं दिखेंगे कहकर सुबह ही ईजा देशान* में गुड़ दे दिया करती थी और मैं बड़ी उत्सुक्तावस गुड़ खाते हुए उठता था कि आज कहाँ धमाका होने वाला है. धमाका दरअसल हर बैशाखी... Read more
कोरोना या कोविड-19 वायरस के प्राकृतिक रूप से पैदा होने या उसके किसी प्रयोगशालामें विकसित हैने के विवाद के बीच यह याद रहना जरूरी है कि प्रयोगशालाओं में होने वाली संदिंग्ध खोजें ही जैविक हथिया... Read more
ईको-टूरिज़्म का स्वप्नद्रष्टा यायावर-लेखक-चित्रकार था जयदीप यायावरी-घुमक्कड़ी का शौक़ कई लोगों को होता है और लेखन प्रतिभा सम्पन्न भी असंख्य होते हैं किंतु इन दोनों का सामंजस्य विरलों में ही... Read more
देश के विभिन्न सूबे सहित उत्तराखंड इन दिनों कोरोना की काली छाया से बचे रहने के लिए लॉकडाउन का पालन कर रहा है. सामाजिक दूरी इसकी पहली शर्त है, इसलिए सभी लोग अपने घरों में बने हैं. इधर के कुछ... Read more
लाड़ से भरे बचपन के गीतों की किताब : घुघूति बासूति
घुघूति बासूतीआमा कां छ?खेत में छ.कि करन रे छ?(Ghughuti Basuti Uttarakhand Children Songs) दुनिया के किसी भी कोने में जब ये शब्द कान में पड़ते हैं तो आंखें बंद हो जाती हैं और सुकून से भरा एक च... Read more
आखिरी गाँव में जबरदस्त जीवट की अकेली अम्मा
धरती गोल है और गोले में कोई बिंदु आखिरी नहीं होता. अक्सर आखिरी पहला हो जाता है. हिमालय की घाटियों में बहुत से गाँव आखिरी गाँव कहे जा सकते हैं. सबसे मशहूर आखिरी गाँव माणा है. लेकिन जैसा कि मै... Read more
आपदा की पहली मार पर्यटन को
किसी भी मानव जनित या प्राकृतिक आपदा का खामियाजा सबसे पहले पर्यटन क्षेत्र को ही भुगतना पड़ता है. 2001 में अमेरिका में हुआ 9/11 और फिर 2008 में भारत में हुआ 26/11 का बड़ा आतंकी हमला हो या फिर... Read more
आज का अल्मोड़ा देख सुमित्रानंदन पन्त नहीं लिख पाते : यह है अल्मोड़े का बसंत
लो चित्र शलभ सी पंख खोल, उड़ने को है कुसमित धाती.यह है अल्मोड़े का बसंत, खिल उठी निखिल पर्वत घाटी. ये पंक्तियाँ हिन्दी के सुकुमार कवि सुमित्रानन्दन पन्त ने शहर अल्मोड़ा के सौन्दर्य को लेकर... Read more
इटली के रोम में पहाड़ की लड़की
रोम पहुंचते ही सबसे पहली बात ये पता लगी कि यहाँ के लोगों के लिए ये ‘रोमा’ है. एयरपोर्ट से लेकर बस तक, दीवारों मे, इश्तिहारों में सब जगह ‘रोमा’ लिखा है वो भी बड़ा-बड़ा. इसलिए रोमा में आपका स्... Read more
घट के पाट और चोखी बसंतमूली की सब्जी
ह्यून में अच्छा झड़ पड़े और बसंत में डाल न बरसे तो हमारे गाँव में इतना गेहूं तो हो जाता कि छ: साथ महीने तक गुजारा चल जाय. जिस साल चौमास सही बरसा और ह्यून सूखा न जाए तो फागुन चैत तक गाड़ किना... Read more
























