यूट्यूब स्टार पवन की पहाड़ी बाखली में मिलता है परम्परा और आधुनिकता का मेल
चौकोड़ी से बागेश्वर जाने वाली सड़क में कोटमन्या से शुरु होता है एक अद्भुत संसार. घने, छायादार जंगलों के बीच होती हुई यह सड़क आपको पांखू की तरफ ले जाती है. दसियों खुबसूरत जलधारे इस सड़क को पार... Read more
ढांटा ब्या उत्तराखण्ड के खशों में प्रचलित तथा सामाजिक मान्यता प्राप्त निरनुष्ठानिक विवाह का एक प्रकार था. इसमें कोई सधवा (परिव्यक्ता या अपरित्यक्ता) अपने पूर्व पति को अथवा विधवा स्त्री मृत प... Read more
यूं तो कुमाऊँ में ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रवेश 8 मई 1815 को कुमाऊँ के कमिश्नर आफ रेवन्यू के रूप में ई.गार्डिनर की नियुक्ति के साथ हो गया था लेकिन कंपनी ने कुमाऊँ-गढ़वाल के नियंत्रण का मुख्याल... Read more
पहाड़ से सावन की पूर्णिमा के चांद की तस्वीरें
पहाड़ में पूर्णिमा का खूब महत्त्व है फिर इसे धर्म की आस्था से जोड़कर देखा जाय या लोकजीवन से. चांद की रौशनी कुमाऊनी में ज्यून कहलाती है और चांदनी रात ज्यूनाली रात. ढ़ेरों लोकगीत हैं जिसमें ज्... Read more
पिथौरागढ़ नगर के पूरब में एक सुंदर सा गाँव है द्यौत जिसे देवत भी कहते हैं. गांव वाले जहां से पानी हैं उसे पनेर कहते हैं. मीठे पानी के इस स्त्रोत से एक सुंदर लोककथा जुड़ी है.(Folk Stories of... Read more
बरसात में पहाड़ और भी खुबसूरत हो जाते हैं और चटख हरे रंग के जगंलों से सजी उनकी खुबसूरती में चार चांद लगा देते हैं बरसाती झरने. झरने के लिये कुमाऊनी में प्रयोग किया गया शब्द छीड़ है. ऊंचे पहा... Read more
चाय की दूकान में काम करने वाले राजीव ने किया कमाल
हल्द्वानी में नैनीताल रोड पर तिकोनिया के पास श्री राम अस्पताल के बाहर नंदू चाय की दुकान का ठेला लगता है. Success Story of a Boy Working in Tea Shop मूल रूप से हैड़ाखान निवासी नंदन सिंह यहाँ क... Read more
जीवित हो अगर, तो जियो जमकर
बुद्ध से जुड़ी हुई कई कथाएं हैं, जो हमें जीवन के बहुत गहरे संदेश देती हैं. ऐसी ही एक कथा है बुद्ध और गौतमी की. बुद्ध के समय में श्रावस्ती नगरी में एक कृशा गौतमी नामक महिला रहती थी. उसका एक ब... Read more
क्या है डिजिटल लाइब्रेरियों का भविष्य?
अगर आप इसे पढ़ रहे हैं तो आपके लिए एक ज़रूरी सूचना है. तकरीबन दो-तीन माह पूर्व मुझे एक दोस्त ने एक वाट्सएप ग्रुप का हिस्सा बनाया जहाँ किताबों की डिजिटल कॉपी या पीडीएफ फाइल शेयर की जाती है. कॉप... Read more
शिब जू का प्यारा महीना हुआ सावन और इसी सावन की पून्यूं यानि पूर्णिमा के दिन पहाड़ में मनाई जाती है, ” जन्यो पून्यूं”. इस दिन नई जनेऊ धारण की जाती है. जनेऊ बनाने और... Read more
























