समळौण्या होती सैकोट के सेरों की रोपाई
गढ़वाल के उन गिने-चुने गाँवों में से एक है सैकोट जिनकी उपजाऊ ज़मीन पहली नज़र में ही मन को भा जाती है. खेती ऐसी जैसे कुदरत ने गाँव के आगे हरियाला आँगन बना के दिया हो. सिंचित हरी-भरी खेती वाला... Read more
बहुत भरोसेमंद था रमुआ बल्द
बचपन गजब होता है जो बातें उन दिनों अखरती हैं वहीं बाद में मधुरता घोलती दिखाई देती हैं. कुछ बातें ऐसी होती हैं जो यूँ ही यादगार बन जाती हैं. भाबर में उन दिनों खेतों की जुताई का कार्य बैलों से... Read more
जाड़ इलाके की नमकीन चहा ‘ज्या’
उच्च हिमालय और सीमांत के इलाके में उत्तरकाशी से आगे गंगोत्री मार्ग में पसरी है भैरोघाटी. भैरो घाटी से ऊपर पश्चिमी इलाके कारछा, हिण्डोली और निलांग गाँव हैं. इस जिले को च्छोङ्गसा कहते हैं. स्थ... Read more
मां के गर्भ में शिशु उसका ही अंश होता है और हर मां को अपना शिशु प्यारा होता है. यही कारण है कि उसे जन्म देते समय वह असहनीय दर्द भी सहर्ष सहन करती है. दरअसल गर्भावस्था महिलाओं के लिये महत्वपू... Read more
एक थी शर्मीली
कॉर्बेट की एक ऐसी बाघिन जिसने अपनी असाधारण सुंदरता, अदभुत शारीरिक डील-डौल व शिकार करने के अभूतपूर्व क्षमता से देश ही नहीं वरन पूरे विश्व में प्रसिद्धि हासिल की. (Memoirs of Corbett Par... Read more
अब सुनने को नहीं मिलते हैं पहाड़ के मेलों में ‘बैर’
वैरा जिसे बैर भी कहते हैं, इसका शाब्दिक अर्थ संघर्ष है जो गीत-युद्ध के रूप में गायकों के बीच होता है. इसमें एक पक्ष दूसरे को पराजित करने की चेष्टा करता है. अपने पक्ष का समर्थन और दूसरे पक्ष... Read more
भाबर के इलाके वास्तव में पहाड़ियों की ही भूमि है
एक समय ऐसा भी था जब कुमाऊं में भाबर की जमीन पहाड़ियों की हुआ करती थी. पहाड़ में रहने वाले लोगों की भाबर में स्थित इन जमीनों में उनके स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के घर हुआ करते थे. नवम्बर से... Read more
चंद्रकुंवर बर्त्वाल की कविता ‘काफल पाक्कू’
हे मेरे प्रदेश के वासीछा जाती वसन्त जाने से जब सर्वत्र उदासीझरते झर-झर कुसुम तभी, धरती बनती विधवा सीगंध-अंध अलि होकर म्लान, गाते प्रिय समाधि पर गानएक अंधेरी रात, बरसते थे जब मेघ गरजतेजाग उठा... Read more
2 फरवरी 1925 को जन्मे पहाड़ के महान कलाकार जीत सिंह नेगी की आज पहली पुण्यतिथि है. जीत सिंह नेगी ने छः दशक से अधिक समय तक लोकसंगीत की साधना की थी. जीत सिंह नेगी को गढ़वाली गीत-संगीत-रंगकर्म क... Read more
प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता
तुम्हारी निश्चल आंखेंचमकती हैं मेरे अकेलेपन की रात के आकाश मेंप्रेम पिता का दिखाई नहीं देताईथर की तरह होता हैजरूर दिखायी देती होंगी नसीहतेंनुकीले पत्थरों-सी दुनिया भर के पिताओं की लम्बी कतार... Read more
























