नैनीताल के डुट्याल व उनसे जुड़े रोचक किस्से
डुट्याव या डुट्याल शब्द जेहन में आते ही एक बेवकूफ, बेशऊर, बदनुमा से इन्सान का चित्र उभरता है- पसीने से तर-बतर, बोझ तले दबे अंगुलियों के पोरों से माथे के पसीने को झाड़ता, चूड़ीदार पैजामा, लम्... Read more
कोसी नदी के शांत और दिलकश तट पर स्थित है गिरिराज हिमालय की पुत्री ‘गर्जिया’ का पावन स्थल. ढिकुली और सुंदरखाल गांव के पास गर्जिया मंदिर की खूब मान्यता है. नवरात्रों में यहां गर्जिया मां के द... Read more
हमारे दिमाग़ पर फेसबुक का अनधिकृत कब्जा
हाल ही में फेसबुक और उसकी संतानें, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम, रात करीब 6 घंटे तक बंद रहे. इन सोशल मीडिया एप्स के करीब 3 अरब यूजर्स इस बंद से प्रभावित हुए. इस मौके पर हमें भी कुछ देर ये सोचने... Read more
भारत की अंडर 19 टीम को 2012 में विश्व विजेता बनाने वाले टीम के कप्तान उन्मुक्त चंद, जो कि मूल रूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के रहने वाले हैं, भारत में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से... Read more
आज बोया जाता है ‘हरेला’
हरेला, उत्तराखंड का एक लोकप्रिय त्यौहार है. उत्तराखंड में हरेला साल में तीन बार मनाया जाने वाला प्रकृति से जुड़ा एक लोकपर्व है. हरेला पर्व उत्तराखंड के लोगों का प्रकृति से जुड़ाव दिखाता है.(... Read more
गुलजार की कहानी : धुआँ
बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में ‘धुआँ’ भर गया. चौधरी की मौत सुबह चार बजे हुई थी. सात बजे तक चौधराइन ने रो-धो कर होश सम्भाले और सबसे पहले मुल्ला... Read more
पहाड़ों में लच्छू कोठारी की बेवकूफ संतानों के किस्से खूब कहे जाते हैं. उनकी बेवकूफी के किस्से इस कदर लोकप्रिय हैं कि पहाड़ में आज भी जब कोई हद दर्जे की बेवकूफी करे तो सीधा कहा जाता है- कि कर... Read more
सेम मुखेम में नागराजा की माया
पहाड़ों में उसके सीमांत से जान -पहचान बढ़ाने के लिए की जाने वाली पद यात्राएं बहुत कुछ दे जातीं हैं. वह नयनाभिराम दृश्य तो होते ही हैं जो सबको रिझाते हैं. बार-बार आने का न्यूत दे जाते हैं. दू... Read more
मोहब्बत का जो रस्ता है बहुत दुश्वार होता है
शांतिप्रिय तिब्बतियों के मुल्क पर चीन के क्रूर कब्ज़े को चालीस साल बीत चुके थे. एक समय पूर्वी दर्शन के सबसे बड़े केंद्र रहे ल्हासा की सड़कें चीनी सिपाहियों के बूटों तले रौंदी जा रही थीं. तमा... Read more
ज्ञानरंजन की कहानी ‘छलांग’
श्रीमती ज्वेल जब यहाँ आकर बसीं तो लगा कि मैं, एकबारगी और एकतरफा, उनसे फँस गया हूँ और उन्हें छोड़ नहीं सकता. एक गंभीर शुरुआत लगती थी और यह बात यूँ सच मालूम पड़ी कि दूसरे साथियों की तरह, मैं ल... Read more


























