पहाड़ों को भी समझें अपना घर : रस्किन बॉन्ड
मैं पिछले छः दशकों से मसूरी में रह रहा हूँ. मसूरी में न होता तो शायद मैं इतना लिख भी नहीं पाता. सही मायनों में इन वादियों ने मेरे अन्दर के लेखक को बड़ा विस्तार दिया. मेरा जन्म कसौली में हुआ.... Read more
यूं बनाओ जिंदगी को सफलता की एक अजब दास्तां
मनुष्य के जीवन का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि स्थितियां कैसी भी हों, उनके सम्मुख हर पल संभावनाओं के द्वार खुले रहते हैं. कोई पियक्कड़ गई रात जरूरत से ज्यादा पी लेने के बाद सुबह तक गली में ही... Read more
कुछ लोगों का मानना है कि पिछले कुछ समय से पहाड़ के सरकारी स्कूलों में गढ़वाली और कुमाऊनी बोली सिखाने का ढकोसला चलाया जा रहा है. सोशियल मीडिया में लोग ऐसे लोगों की जमकर तारीफ़ भी करते हैं जो... Read more
पहाड़ी बारिश की ध्वनियां
रात भर बारिश टिन की छत को किसी ढोल या नगाड़े की तरह बजाती रही. नहीं, वह कोई आंधी नहीं थी. न ही वह कोई बवंडर था. वह तो महज मौसम की एक झड़ी थी, एक सुर में बरसती हुई. अगर हम जाग रहे हों तो इस ध... Read more
घर-वापसी : बेला नेगी की कहानी
फेसमास्क लापरवाही से गले पर लटकाये, अधीरता से गाड़ी की खिड़की से अंदर झांकते हुए, पुलिस वाला शेखर को शक की निगाह से घूर रहा था — नाजुक नाक-नक्श, गोरी त्वचा जो उम्र के बजाये सुस्त स्वास... Read more
कुमाऊं से जुड़ी हॉलीवुड की पहली फिल्म
‘मैन ईटर ऑफ़ कुमाऊं’ हॉलीवुड में बनी एक फिल्म है. बायरॉन हस्किन द्वारा निर्देशित इस फिल्म में साबू दस्तगीर, वेन्डेल कोरे और जॉय पेज जैसे कलाकारों ने काम किया था. फिल्म की स्क्रिप्ट जिम कार्ब... Read more
जगजीत सिंह ‘निशात’ वर्तमान में जयपुर में रहते हैं. पेंटिंग, गायकी का शौक रखने वाले जगजीत जी राजस्थान के ज़ियोलोजी विभाग से रिटार्यड हो चुके हैं. उनके गायन से संबंधित वीडियो CSamdar यूट्यूब च... Read more
बूढ़े पहाड़ों के बीमार अस्पताल
इस वर्ष के केंद्रीय बजट में ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने पर भी काफी ज़ोर दिया गया है. एक ओर जहां क्रिटिकल केयर अस्पताल खोलने की बात की गई है, वहीं 75 हज़ार नए ग्रामीण हेल्थ स... Read more
गौर्दा की कुमाऊनी कविता ‘झन दिया कुल्ली बेगार’
मुल्क कुमाऊँ का सुणि लिया यारो,झन दिया कुल्ली बेगार.चाहे पड़ी जा डंडै की मार,झेल हुणी लै होवौ तय्यार. तीन दिन ख्वे बेर मिल आना चार,आंखा देखूनी फिर जमादार.घर कुड़ि बांजि करि छोड़ि सब कार,हांक... Read more
मनोहर श्याम जोशी के उपन्यास ‘क्याप’ से मूली फसल
बाहर वालों को हमारी उस किस्म की गप्पें भी पसंद आयीं, जिनमें हम ऐसा जताते थे मानों गिनीज बुक आफ रिकार्ड में जा सकने योग्य सभी अद्भुत घटनायें और चीजें हमारे इलाके में होती हों. फर्ज़ कीजिये कि... Read more
























