यूं ही कोई दाज्यू नहीं बन पाता
दाज्यू बोले तो, भाईजी या बड़ा भाई. बचपन में मुंशी प्रेमचन्द की कहानी बड़े भाई साहब पढ़ी थी. उनके दाज्यू को बाद में कई हिन्दी फिल्मों में देखता रहा. जैमिनी से ए व्ही एम के बैनरों में, बलराज स... Read more
रिंगाल की राखी. यह कल्पना ही स्वयं में अद्भुत है. पहाड़ से जुड़ा कोई भी व्यक्ति के इसे सुनते ही रोमांचित हो जाएगा. इसे साकार किया है हिमालय में रहने वाली महिलाओं ने. इन महिलाओं का अपनी जमीन और... Read more
अपनी अत्युत्तम् प्राकृतिक सौन्दर्यता की अत्यधिक धनी, हर व्यक्ति के मन को बार-बार मोहित करने वाली इस नैनीताल नगरी की सबसे ऊँची चोटी “नैना पीक” है. जिस रमणीक चोटी में जाकर हर व्यक्... Read more
कुमाऊनी महाभारत गाथा से एक दिलचस्प अनसुनी कथा
एक दिन भटकते हुए सातों पाण्डव एक दुद बुढ़िया (नर मांस खाने वाली एक बढिया) के घर पहुँचे. यह दुद बुढ़िया कहने लगी कि मैं एक की बलि लेती हूँ. जो भी यहाँ पर आता है उसमें से एक का भक्षण मैं अवश्य... Read more
घर पर ऐसे बनती है पहाड़ियों की जनेऊ
जन्यौ पुन्यू के अवसर पर आपके कुल पुरोहित आपको जनेऊ भेट करने अवश्य आयेंगे, यदि वे बाजार से खरीदकर जनेऊ आपको दे रहे हों तो बात अलग है अन्यथा यदि वे स्वयं अपने हाथ से बनी जनेऊ आपको भेंट करें ,... Read more
क्यों रखते हैं किसी के सिरहाने लोहे की दरांती
सभी जानते हैं मनुष्य जाति द्वारा लोहे का इस्तेमाल किये जाने से पहले प्रस्तर युग और कांस्य युग थे. यही कारण था कि जहाँ शुरुआती धार्मिक अनुष्ठानों में लोहे के प्रयोग को वर्जित माना जाता था वही... Read more
आमा की दुआ है कि ऐसा साल फिर कभी न आये
“ईजा यौ साल कभैं नी आण चैं,” आमा के मुह से एक दर्द भरे लहजे में यह बात निकली. मैं जब आज बैंक गया था तब आमा मुझे वही मिली. आमा ने जिस स्नेह से मुझसे बात करी उसे मैं लफ़्ज़ों में ब... Read more
पहाड़ियों के गोठ में रहने वाले जानवरों को होने वाले रोग और सयानों के बताये ईलाज
पहाड़ में हर घर गोठ में जानवर हो और उनकी देखभाल में कोई कोर कसर रह जाए तो घर की बूड़ि बाडियों को फड़फड़ेट हो जाती है. ब्वारियों की शामत आ जाने वाली हुई और पशुओं की सार संभार में चेलियों की स... Read more
आकाशवाणी के कार्यक्रम उत्तरायण को पहाड़ियों की सांस्कृतिक धड़कन बनाने वाले बंसीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ : पुण्यतिथि विशेष
कोई 30-31 वर्ष तक आकाशवाणी के शॉर्ट वेव 61.48 यानी 4480 किलोहर्ट्ज पर रोज शाम सुदूर पर्वतीय अंचल (उत्तराखण्ड) के श्रोता ठीक शाम 5.45 बजे सुनते थे दो सुपरिचित आवाजें –उत्तरायण का श्रोता... Read more
एक लड़की और उसका पति जो सर्प था – कुमाऊनी लोककथा
एक बार एक आदमी की एक पत्नी थी. आदमी उससे नाराज था. उसने खुद से कहा, “अगर मैं एक पत्थर को भी तोडूं तो मुझे दो पत्थर मिलते हैं लेकिन अपनी बीवी से मुझे कुछ नहीं मिलता. वह बेवकूफ और बेकार है.” ऐ... Read more



















