भटिया: पहाड़ में पुरखों की ताकत का असल राज
पहाड़ के भोजन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सरलता है. गरीबी और पहाड़ एक दूसरे के पूरक रहे हैं. एक लम्बे समय तक पहाड़ के लोगों के पास खाने को बस वही था जो हाड़-तोड़ मेहनत के बाद सीढ़ीदार खेतों की... Read more
सनगाड़ के ‘नौलिंग देवता’ से जुड़ी लोककथा
बहुत पुरानी बात है बागेश्वर के फरसाली गांव में एक नरभक्षी राक्षस उत्पन्न हो गया. राक्षस ने गांव उजाड़ दिया और वहां के लोगों को खा गया. अब जब गांव में एक ही आदमी बचा तो वह उसे खाने को दौड़ा.... Read more
उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य की राजधानी देहरादून में पांचवे धाम के रूप में सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है. सैन्यधाम के लिए उत्तराखंड के शहीदों के घर से मिट्टी लाई जा रही है. पिथौरागढ़ ज... Read more
पहाड़ में कौतिक की बेमिसाल यादें
कौतिक का मतलब होता है मेला. मेले तो हर जगह लगते हैं और हर मेले का अपना सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और व्यापारिक महत्व रहा है. कुमाऊं गढ़वाल के कई मेले प्रसिद्ध हैं. इन मेलों पर शिरकत करके पहाड़ के... Read more
एक थे कैप्टन धूम सिंह चौहान
बचपन से लेकर जवानी के दिनो तक हम गौचर कस्बे को मेले के लिए जानते थे. गौचर-पानाई का समतल, सेरे (तलाऊ जमीन), विद्यालयी शिक्षा बोर्ड परीक्षा का मूल्यांकन केन्द्र, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्... Read more
बद्रीनाथ की 200 साल पुरानी तस्वीर
1808 के समय तक यह माना जाता था कि गढ़वाल स्थित गोमुख में गंगा का उद्गम स्थल है लेकिन कुछ लोगों का मानना था कि गंगा नदी का उद्गम स्थल मानसरोवर ताल है यह मानसरोवर से हिमालय के बीच एक घाटी से ह... Read more
इगास लोकपर्व को राजपत्र में स्थान मिलने के मायने
आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है. इक्कीस साल के उत्तराखण्ड में, इसके किसी लोकपर्व को पहली बार राजपत्र में स्थान मिला है. आज उत्तराखण्ड में इगास का राजकीय अवकाश है. इससे पूर्व हरेला को भी राजपत्र... Read more
गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की कविता: बाल दिवस विशेष
प्रख्यात जनधर्मी कलाकार-कवि के रूप में गिर्दा हमारे दिलों में अमर हैं. बाल दिवस पर सुनिये युवा कलाकार करन जोशी द्वारा संगीतबद्ध गिर्दा की कविता ‘जहाँ न पटरी माथा फोड़े, ऐसा हो स्कूल हम... Read more
ठेठ पहाड़ी खेलों की याद
खेल के मैदान में आजकल भारत के कई खिलाड़ी कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं. पढाई के साथ खेलकूद को भी प्रोत्साहन मिल रहा है और हमारे समय की कहावत- पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब... Read more
कुमाऊं के अल्मोड़ा क्षेत्र में जब समुद्री यात्रा करने वाले को जाति से बाहर किया जाता था
भारत में लम्बे समय तक समुद्री यात्रा करना पाप समझा जाता था जिसका एक कारण हिन्दू धर्म में समुद्र को देवता के रूप में पूजा जाना था और देवता को लांघने की कल्पना कर सकना भी भारतीयों की पहुंच से... Read more

























