देश की सेना के शौर्य परम्परा की गौरवपूर्ण गाथा में 16 दिसम्बर 1971 का दिन स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया, जब देश के रणबांकुरों ने सीमाओं पर दुश्मन के दांत खट्टे कर इतिहास रच डाला. विश्व के... Read more
200 साल पहले ऐसा दिखता था चम्पावत
कुमाऊं के सबसे पुराने शहरों में एक शहर है चम्पावत. काली कुमाऊं की राजधानी के रूप में जाना जाने वाला यह शहर हमेशा से इस क्षेत्र की राजनीति के केंद्र में रहा. चम्पावत के किले और शहर की यह पेंट... Read more
माना जाता है कि मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से इस संसार को गीता के उपदेश दिये थे. इसी कारण इस दिन को गीता जयंती के रूप में देशभर में मनाया... Read more
150 साल पहले ऐसा दिखता था अल्मोड़ा बाज़ार
अपने इतिहास के अलावा अल्मोड़ा अपनी खूबसूरती के लिये खूब जाना जाता है. अल्मोड़ा की ख़ास आबोहवा हर किसी को इस शहर का दिवाना बना देती है. कुमाऊं में दो नदियों के बीच बसे इस शहर के एक हिस्से को... Read more
2021 में फिल्म फेयर में पुरुस्कारों की श्रेणी में ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिये एक नई श्रेणी जोड़ी गयी. 2021 के फिल्म फेयर अवार्ड की इस श्रेणी में सुनीता रजवार को बेस्ट स्पोर्टिंग एक्ट्रेस का अवा... Read more
हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय ‘डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल’
उत्तराखण्ड में साहित्य, ज्योतिष और दर्शन की परम्परा प्राचीन रही है. उत्तर वैदिक काल में इस अंचल में भारद्वाज आश्रम, कण्वाश्रम, बदरीकाश्रम और शुक्राश्रम जैसे सिद्धपीठों से वेद-वेदागों का पठन-... Read more
हिंदी कवि मंगलेश डबराल को गुज़रे एक साल हुआ. नौ दिसंबर 2020 को कोरोना महामारी से उनकी जान गई. प्रस्तुत संस्मरणनुमा वृत्तांत, कवि के कमरों के हवाले से है, जहां कवि बचपन से लेकर देह के आख़िरी... Read more
कुमाऊनी और गढ़वाली के शब्द जिनसे हिन्दी और निखरेगी
दुर्भाग्य से हिन्दी बोलियों को अछूत मानती है. बोलियों में ऐसे अर्थ पूर्ण शब्द है कि हिन्दी का उधर ध्यान ही नहीं है. पहाड़ी में ऐसे हजारों शब्द हैं जिनके प्रयोग से हिन्दी विभिन्न अर्थ छवियों... Read more
वरिष्ठता का पैमाना है पहाड़ी नामकरण का भात
नामकरण हमारे हिन्दू धर्म का पांचवां संस्कार होता है इस दिन माता-पिता नहाकर नए वस्त्र पहनते हैं और शिशु को भी नहलाकर नए कपड़े पहनाए जाते हैं. फिर माता-पिता बच्चे को अपनी गोद में लेकर हवन स्थल... Read more
वन अनुसंधान संस्थान ‘एफआरआई,’ देहरादून का इतिहास
भारत में जब अंग्रेजों ने अपने पैर पसारना शुरू किया तो उन्हें उत्तर भारत के विशाल जंगलों का महत्त्व जल्द ही समझ आ गया. विश्व इतिहास में यह एक ऐसा समय था जब नौसेना ही किसी भी देश की निर्णायक श... Read more

























