जिस ज़माने में मेरे साथ के अन्य बच्चे गुल्ली डंडा खेलते थे उस ज़माने में मैंने स्नूकर खेलना सीख लिया था यह कहना है मुक्तेश्वर निवासी 95 वर्षीय बुजुर्ग कमलापति पाण्डेय का जो बचपन से स्नूकर के... Read more
2 जनवरी 1970 को उत्तराखण्ड के देहरादून में जन्मे विवेक गुप्ता को सेना से प्यार विरासत में मिला था. उन्हें अपने पिता कर्नल बीआरएस गुप्ता की सुनाई सेना और सैन्य पराक्रम की कहानियां हमेशा ही रो... Read more
उत्तराखण्ड के शूरवीर: कारगिल शहीद महावीर चक्र से सम्मानित मेजर राजेश सिंह अधिकारी
मेजर राजेश सिंह अधिकारी (25 दिसंबर 1970 से 30 मई 1999) भारतीय सीमा की बहादुरी के साथ रक्षा करने वाले राजेश सिंह अधिकारी नैनीताल में पैदा हुए. शुरुआती पढ़ाई-लिखाई सेंट जोसेफ स्कूल से करने के... Read more
पहाड़ में रोजगार को लेकर पलायन की कहानियां अक्सर सुनने को मिलती हैं. कभी पानी का न होना तो कभी बंदर, सुअर आदि जंगली जानवरों से खेती को नुकसान होना, बहुत सी समस्यायें सुनने व देखने को मिलती ह... Read more
उप्पू गढ़ को जवान धन रे कफ्फू चौहान
एक समय की बात है गढ़वाल पर अजयपाल नाम का राजा शासन करता था. उसकी ताजपोशी के वक्त राज्य के सभी सरदार व गणमान्य व्यक्ति दरबार में राजा के प्रति अपनी स्वामिभक्ति प्रकट करने व नज़राना देने के लि... Read more
पिथौरागढ़ की सौर्याली और काली पार डोटी अंचल की साझी झलक है कबूतरी देवी के गीतों में
कबूतरी देवी का उत्तराखण्ड और हिमालयी इलाके के लोक संगीत में एक बहुत बड़ा नाम रहा है. मधुर और खनकती आवाज की धनी कबूतरी देवी को उत्तराखण्ड में सभी जानते हैं. आज से तीन-चार दशक पूर्व लखनऊ और नज... Read more
जन्मान्ध हरदा सूरदास गाते हुए जब-जब भावावेश के चरम पर पहुँचते थे, सफ़ेद पड़ चुकी पुतलियों वाली उनकी ज्योतिहीन आँखों के कोरों से आंसू बहना शुरू हो जाते. पूरे चाँद की उस जादुई रात नैनीताल के ए... Read more
आठ करोड़ पौधे लगाने वाले पिथौरागढ़ के पर्यावरणविद कुंवर दामोदर सिंह राठौर
2016 में मई महीने में डीडीहाट के आस-पास के जंगलों में आग लगती है. भनौरा गांव में रहने वाला 91 बरस का एक बूढ़ा अपनी लाठी के सहारे निकल पड़ता है जंगल की ओर आग बुझाने. आग बुझाने के प्रयास में उसे... Read more
उत्तराखण्ड की नमकवाली का मशहूर पिस्यूं लूण
देश दुनिया के लोगों ने देखा होगा केवल सफ़ेद नमक. लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों में रहने वाले लोगों ने नमक का एक स्वादिष्ट रूप जरुर देखा होगा जिसे स्थनीय भाषा में पिस्यूं लूण कहते हैं. आज मिलिये उ... Read more
कुमाऊंनी गीतों में जब एकबार बाजारूपन आना शुरु हुआ फिर वह कभी खत्म नहीं हुआ. गीतों के नाम पर फूहड़ता और संगीत के नाम पर ऑटोटोन आज भी कुमाऊंनी गीतों में जारी है. निराशा के इस माहौल के बावजूद कु... Read more


























