उत्तराखंड की हल्द्वानी जेल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. चर्चा में आने कारण कोई आपराधिक घटना या किसी आरोपी का फरार होना नहीं है बल्कि जेल टूरिज्म जैसी एक व्यवस्था की शुरुआत करने जैस... Read more
वेशभूषा से किसी भी इलाके के स्थानीय निवासियों की पहचान होती है. ये वेशभूषाएं पारंपरिक तौर पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहनी जाती हैं. ये पारंपरिक परिधान औए वेशभूषाएं कैसी होंगी यह कई बातों से तय होता ह... Read more
पहाड़ी मूली नहीं है मामूली
‘किस खेत की मूली’ (कमजोर या अधिकारविहीन, ‘मूली-गाजर समझना’ (कमजोर) और ‘खाली मूली में’ (व्यर्थ में) जैसी लोकोक्तियां अथवा वाक्यांश यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं कि मूली को बेहद मामूली, कम... Read more
‘चिड़ी की दुक्की’ अजब है यह कहानी
नाम तो उनका अब्दुल हई था मगर दिलवालियाँ उन्हें प्यार से ‘हाय’ कहा करती थीं. वो थे भी सर से पाँव तक एक हसीन और दिलचस्प हाय. सोने की तरह दमकता रंग, सूरज की किरनों को शरमा देने वाले... Read more
स्कूल में कॉलेज के लड़कों और महिलाओं के जुलूस के जत्थे आने की धुंधली तस्वीरें याद हैं. दूर से आती नारों की गूंज या जनगीतों की आवाजों का मतलब हमारे लिये स्कूल की छुट्टी से ज्यादा कुछ नहीं था.... Read more
नेगीदा की वसंत नायिका
काव्य कला का सौष्ठव उसके सब कुछ कह देने में नहीं, बल्कि, अनकहे अंश में है. जैसे अपने पति का नाम न लेने वाली कोई ग्रामीण-नायिका, पति के बारे में पूछे जाने पर हल्के-से मुस्कुरा दे, और नैनो के... Read more
औरत पहाड़ का नाम है
आंचलिक भाषा मेंमांगलिक गीत गाते हुएवे रोपती हैंज़िदगी की जड़ें पानी में रंग-बिरंगी पोशाकेंमाटी में सने हाथजैसेपिघले सोने में सने हाथ ज़मीन को दिन भर नमन करती कमरशाम को चूल्हे से होते हुएबिस्... Read more
आज शमशेर सिंह बिष्ट की पुण्यतिथि है
यह जनवरी 1974, का वाकिया है जब प्रसिद्ध गांधीवादी सर्वोदय कार्यकर्ता श्री सुंदरलाल बहुगुणा उत्तराखंड में अपनी 127 दिवसीय 1500 किलोमीटर लंबी यात्रा के मध्य अल्मोड़ा में रैन बसेरा होटल में ठहर... Read more
भारतीय इतिहास लेखन में क्षेत्रीय इतिहास की भूमिकाः उत्तराखण्ड के संदर्भ में
भारत के प्रथम ऐतिहासिक ग्रंथ राजतरंगिणी के रचियता कल्हण ने ठीक ही कहा है— श्लाध्यः स एव गुणवान् रागद्वेष बहिष्कृता भूतार्थकथने यस्य स्थेयस्येव सरस्वती अर्थात्, ‘वही गुणवान प्रशंसन... Read more
जीवन का सत्य है अज्ञेय की कहानी ‘दुःख और तितलियाँ’
शेखर उस पहाड़ी से उतरता हुआ चला जा रहा था. उसके क़दम अपनी अभ्यस्त साधारण गति से पड़ रहे थे, वह किसी प्रकार की जल्दी नहीं कर रहा था क्योंकि यद्यपि वह अपने मन में उसे स्वीकार नहीं कर रहा था, त... Read more


























