तनावहीन चेहरे वाला एक लेखक : पंकज बिष्ट
पहली मुलाक़ात में ही मैंने महसूस किया था कि हम दोनों के बीच कई चीजें समान होते हुए भी वह मुझसे बड़े हैं. हमारा सरनेम एक था, जन्म वर्ष एक था, मेरी तरह वह भी कहानी लिखते थे; पारिवारिक पृष्ठभूम... Read more
युवाओं का मजाक उड़ाने के लिये निकलती हैं उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की विज्ञप्ति
1954 में एक फिल्म आई थी ‘नौकरी’. इस फिल्म में किशोर दा की आवाज में एक गाना है जिसके बोल कुछ यूं हैं : एक छोटी-सी नौकरी का तलबगार हूँ मैंतुमसे कुछ और जो मांगू तो गुनहगार हूँ मैंएक... Read more
राजा-महाराजा की शाही यात्रा को टक्कर देता उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का काफिला
राजा महाराज की कहानी हम लोगों ने खूब सुनी हैं. कहते हैं जब राजा आता था तो उसकी पालकी के आगे पीछे खूब सारे हाथी घोड़े निकलते थे. जिनका खर्चा जनता उठाती थी. Uttarakhand CM in Bageshwar अब राजतं... Read more
पहाड़ की लड़कियों का पहाड़ सा जीवन
आंगन की भीढ़ी में बैठे-बैठे हरूवा सुबह से पांच बीड़ी फूंक चुका था. बेटी की शादी में महज 10 दिन रह गए थे. पहाड़ियों का एक अलग ही लॉजिक होता है, टेंशन के समय में बीड़ी फूकने से काम करने की थोड... Read more
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 45 (Column by Gayatree arya 45) पिछली किस्त का लिंक: अपने मातृत्व और कृतित्व के बीच में पिसती हूं मैं हर बार तुम्हारा किसी न किसी कारण से रोना या च... Read more
सुबह जागे तो बाहर का नजारा शांत था. सर्पाकार कुट्टी यांग्ती नदी के सामने सूरज की किरणों से सुनहरी आभा लिए धवल हिम शिखर लुभा रहे थे. ये अन्नपूर्णा व आपी-नाम्फा के शिखर थे. टैंट पैक करने के सा... Read more
1962 में 10 अगस्त के दिन अल्मोड़ा जिले के पास द्वाराहाट कस्बे में पड़ने वाले गांव पान बड़ैती में एक बच्चे का जन्म होता है. कौन जानता था कि हरीश पांडे और रेवा पांडे के घर में जन्म लेने वाले इस... Read more
‘गढ़केसरी’ अनुसूया प्रसाद बहुगुणा का जन्मदिन है आज
रूद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से करीब 32 किमी की दूरी पर एक गांव है ककड़ाखाल. साल 1921 में जब कुमाऊं के बागेश्वर जिले में कुली बेगार को खत्म करने के लिए आन्दोलन जारी था तब इसी गांव से उस समय के ब... Read more
कोई कवि होय हमें क्या हानी
वैसे कविता के नाम पर लोगों की खाल में भूसा भरने की भारत में लंबी परंपरा रही है. अगर याद करें तो आपके हमारे आसपास हमेशा कोई ना कोई भुसकैट कवि विद्यमान रहा है जिसने आपकी सज्जनता भरी सहनशीलता क... Read more
अब दिखावे का ही रह गया है भारत-तिब्बत व्यापार
नाभीढांग की सुबह खुशनुमा था. चाय पीकर हमने वापसी की राह पकड़ी. कालापानी पहुंचने पर पता चला कि आगे कहीं गर्म पानी का स्रोत है. पुल पार कुछ दूर गए ही थे कि एक जगह पर नजर पड़ी, ‘सल्फ... Read more


























