रोटी में पधान रहा गेहूं और मडुए को गरीब का पेट भर सकने की हैसियत मिली. रोज मड़ुआ खा बिछेंन हो गई तो बोल भी फूट पडे, ‘मड़ुआ रोट में नी खानी, ग्युंक पिसु ओल.’ इनके आपसी मेल से लेसु... Read more
गंगोलीहाट का लाल चमयाड़ हो या अल्मोड़े का थापचिनी खूब स्वाद होता है पहाड़ी चावल
पहाड़ में खरीफ की मुख्य फसल होती धान जो उपरांउ व तलाऊँ यानि सेरे में बोई जाती. खूब मेहनत मांगती. छोटे खेत मेंड़ में बंधते. पानी से लबालब. बल्या बेर यानि छांट-छांट कर सुखा कर रखे बीजों से पौं... Read more
उत्तराखंड में अनाज की माप के पारंपरिक बर्तन
ताँबे के बर्तन में रखा पानी शुद्धता और स्वाद के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता. वहीं लोहे की कढ़ाई साग पात, जौला, भटिया झोली बनाने में रोज ही काम में लायी जाती. बर्तन को पोछ कर खाने की होड़ भ... Read more
पहाड़ में पेड़-पौधों के रेशों से बनने वाले उत्पाद
पहाड़ में अनेक पेड़-पौंधों से रेशा निकला जाता जिनमें रामबांस, भाँग, बबिला, मालू, मूँज, मोथा, अल, उदाल, धान का पुवाल, गेहूं का नलौ, कुचिया बाजुर, यूका, थाकल मुख्य थे. भाँग के रेशों से खूब नरम... Read more
तिजोरी से कम राज नहीं हैं आमा के भकार में
पहाड़ों में ज्यादा मात्रा में अनाज को भकार में रखा जाता. तुन, चीड़ और देवदार के तख्तों या पटलों से भकार बनाये जाते. इसमें कई खाने बना दिये जाते और हर खाने में अनाज की अलग-अलग किस्म रख कर लकड... Read more
ईजा कैंजा की थपकियों के साथ उभरते पहाड़ में लोकगीत
हर ऋतु में अपने गीत हैं. खट्ट से आस पास से कई अलंकार समेट फूट पड़ते हैं. मेले ठेले में, पर्व में, कौतिक में, संक्रांती में, कर्मकांड में, ब्रत में, समारोह में, अनुष्ठानों में, त्यो... Read more
पहाड़ों में किसी भी बीमारी में झाड़फूंक का रिवाज चला आया है. पीलिया होने, दाँत में घुनता लगने या कीड़ा लगने, बाई पड़ने, बुखार आने, साँप के डंसने पर अलग अलग तरीकों से झड़वाने की क्रिया स... Read more
उत्तराखण्ड का पारंपरिक पहनावा और जेवर
पहाड़ में नंगा सर रहना बुरा समझा जाता था. सर में टोपी डालने का चलन था. कम हैसियत वाले धोती बांधते. मलेसिया और जूट के पजामे और कुरता बनता. खादी और सूती कपड़ा खूब चलन में था. सुराव, मिरजई, फतु... Read more
गोबर की खाद डालना हो या गाज्यो काटना, पहाड़ों में सब काम मिल बांटकर होते हैं
पहाड़ों में पर्यावरण चक्र के हिसाब से खेती के तरीके विकसित हुए हैं. छः ऋतुओं और बारह महीनों में कोई ना कोई त्यौहार, पर्व या उत्सव मनाया जाता है. संक्रान्ति का विशेष महत्व है जो ऋतु में आने वा... Read more
पहाड़ में काम करने न करने पर लोक विश्वास
पहाड़ में कुछ काम करने न करने पर कुछ लोक विश्वास भी बने रहे जैसे यात्रा करने में वारदोख का विचार. व्यक्ति की पूरब दिशा की ओर सोम बार और छनचर को पश्चिम की तरफ, इतवार और शुक्र को उत्तर की ओर,... Read more
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