स्वच्छ भारत अभियान के लिए कुछ कूड़ा बिखेरकर उसे साफ़ करते हुए फोटो खिंचवाने वाले नेता तो बहुत देखे होंगे. आज मिलिए एक सच्चे जनप्रतिनिधि से जो अपने क्षेत्र में जरूरत पड़ने पर कूड़ा गाड़ी चलान... Read more
जैसे-जैसे आप पहाड़ चढ़ते जाते हैं वैसे-वैसे ढाबों, भोजनालयों, रेस्टोरेंट्स का आकार छोटा होता जाता है. न सिर्फ उनका आकार बल्कि मैन्यू भी पहाड़ चढ़ते हांफ जाता है. दुर्गम क्षेत्रों में तो सब क... Read more
अल्मोड़े का हॉलिडे होम और उसके निम्मी और कोहली
अल्मोड़ा में सबसे पहला प्रवास श्री गोपाल सिंह बिष्ट एवं श्री प्रशांत बिष्ट के सौजन्य से कुमाऊं मंडल विकास निगम के हाॅलिडे होम में हुआ. यह बहुत संक्षिप्त प्रवास था. अल्मोड़ा में जहां कुमाऊं म... Read more
उत्तराखंड के जिला चम्पावत के पाटी ब्लॉक में अक्टूबर 2017 में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना घटी थी. नशे में धुत एक बाप ने अपनी सात वर्षीय बेटी को अपनी वासना का शिकार बनाया था औ... Read more
डॉ शिवप्रसाद डबराल : जिन्होंने अपनी जमीन बेचकर भी उत्तराखंड का इतिहास लिखा
छः वर्षों तक सूरदास बने रहने के कारण लेखन कार्य रुक गया था. प्रकाशन कार्य में निरंतर घाटा पड़ने से प्रेस बेच देना पड़ा. ऑपरेशन से ज्योति पुन: आने पर पता चला कि दर्जनों फाइलें, जिसमें महत्वपूर्... Read more
तब ऐसी ईमानदारी थी हल्द्वानी में
दो दिन पहले एक मित्र का एक दुकान में कुछ सामान खरीदने के दौरान पर्स छूट गया. मेरे मित्र दोबारा पर्स के बारे में पता करने दुकान में पहुंचे तो दुकानदार ने किसी पर्स के मिलने से साफ इन्कार कर द... Read more
जब संपादकीय टिप्पणी के साथ ‘जनजागर’ के मुखपृष्ठ पर मेरी कविता प्रकाशित हुई
पहाड़ और मेरा जीवन – 38 (पिछली कड़ी: एक शराबी की लाश पर महिलाओं के विलाप ने लिखवाई मुझसे पहली कविता ) आठवीं से नवीं में आने के सफर के दौरान मुझे खुद में दो बदलाव साफ दिखाई दिए- पहला तो मैं छ... Read more
उत्तराखण्ड के गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी जिले में है हरसिल. हरसिल उत्तरकाशी गंगोत्री मार्ग पर 72 किमी की दूरी पर है. मनोरम पर्यटन स्थल के तौर पर जाना जाने वाला हरसिल भारत के प्रमुख सैन्य अड्डो... Read more
भारतीय राजनीति में हेमवंती नंदन बहुगुणा को चाणक्य का दर्जा दिया जाता है. उन्हें दूरदर्शी, जनप्रिय नेता माना जाता है. उनके राजनीतिक विवेक के कायल विरोधी तक हुआ करते थे. वे आजादी के आन्दोलन की... Read more
कुमाऊँ-गढ़वाल में बाघ के बच्चे को मारने का दो रुपये ईनाम देती थी क्रूर अंग्रेज सरकार
आज जब कि सारी दुनिया में वन्यजीवों को बचाने के लिए आन्दोलन चलाये जा रहे हैं और सरकारें ‘बाघ बचाओ’ जैसे प्रोजेक्ट्स पर अरबों रुपये खर्च कर रही हैं, भारत में ब्रिटिश राज के दौरान एक समय ऐसा भी... Read more
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