उत्तराखंड का तामता (टम्टा) समुदाय उत्तराखंड का प्राचीन ऐतिहासिक नगर अल्मोड़ा कला व संस्कृति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है. इस नगर की पहचान बुद्धिजीवियों के नगर के रूप में की जाती है.... Read more
ओ ईजा! ओ मां! – पहाड़ की एक भीगी याद
बचपन से आज तक ईजा (मां) को कभी नहीं भूला. वह 1956 में विदा हो गई थी, जब मैं छठी कक्षा में पढ़ रहा था और ग्यारह साल का था. वह मेरी यादों में सदैव जीवित है. जब भी कठिन समय आया तो मुझे लगा मां म... Read more
काली कुमाऊँ योद्धाओं का क्षेत्र है, अतः यहाँ की सभी परंपराएँ शक्ति (ताकत) से जुड़ी हुई हैं. दानवों की भूमि होने के कारण संभवतः न्याय पक्ष के लिए सहज ही अपने प्राण उत्सर्ग करने की प्रवृत्ति य... Read more
घूमने का मौसम है, यात्राओं का मौसम है. उत्तराखंड में भीड़ बढ़ रही है ऐसे वक्त कुछ सुकून के पल ढूँढने के लिए हमने इस बार एक ऐसी घाटी का रुख किया जिसकी खूबसूरती के बारे में बहुत सुन रखा था लेक... Read more
चौकोड़ी की कुछ मनमोहक तस्वीरें
उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है चौकोड़ी. हिमालय के हृदयस्थल में घने जंगलों से घिरी यह छोटी सी बसासत एक समय कुमाऊँ के सबसे बड़े व्यवसायी दान सिंह मालदार की कर्मभूमि रही थी. प्रकृति... Read more
एबट माउंट वाले अंग्रेज साहब का किस्सा
उत्तराखण्ड में कुमाऊँ के जिला चम्पावत के लोहाघाट नगर के नजदीक एबट माउंट नामक एक बहुत ही खूबसूरत स्थान है. करीब साढ़े छः हज़ार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस स्थान की पर्यटन संबंधी तमाम डीटेल्स आपको... Read more
केदारनाथ यात्रा का सच बोलेंगे तो उत्तराखंड सरकार कहेगी बदनाम कर रहे हैं लोग
सीधी खड़ी चढ़ाई पर खच्चर आदमी ढो रहे हैं. सामान और आदमी से लदे इन खच्चरों के ऊपर लदा आदमी असल खच्चर नज़र आ रहा है. हजारों लोग इन खच्चरों की लीद पर अपने कदम रखने के लिये जगह ढूंढ रहे हैं. मन में... Read more
पहाड़ घूमने आ रहे हैं तो बिर्थी फॉल देखने जरूर जाएं
उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी से करीब 35 किलोमीटर दूर है बिर्थी जलप्रपात. अल्मोड़ा-मुनस्यारी मार्ग के रास्ते में पड़ने वाले तेजम से इसकी दूरी 14 किलोमीटर है. यहाँ पहुँचने का एक और र... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 37 (पिछली कड़ी: पहाड़ और मेरा जीवन – 36 :पहाड़ ने पुकारा तो मैं सहरा से लौट आया) पिथौरागढ़ में डिग्री कॉलेज के बगल में सदगुरु निवास मेरे लिए चार साल तक निवास रहा। हमारे प... Read more
बिशन गुरु की मार और ईश्वर से चवन्नी की गुजारिश
जब मैं पहली बार शहर के स्कूल पहुँचा सन 1955 तक मैंने गाँव के स्कूल में पढ़ा जो चारों ओर से ऊँची-नीची पहाड़ियों से घिरे खुले पठारनुमा शिखर पर एक तपस्वी की तरह हर वक़्त हमारी आँखों के सामने मौजूद... Read more
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