1857 का ग़दर और उत्तराखंड
1857 की क्रान्ति तक कुमाऊँ में गार्डनर, ट्रेल, गोवन, लुशिंगटन और बैटन के नेतृत्व में ब्रिटिश कंपनी के शासन को 42 साल गुजर चुके थे. गदर के दौरान कुमाऊँ का कमीश्नर हैनरी रैमजे था. हैनरी रैमजे... Read more
उत्तराखंड में कृषि भूमि का केवल 12% सिंचित है. यहाँ की 50% से अधिक आबादी को रोजगार कृषि से ही प्राप्त होता है. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल इलाके में किसान ऐसा फसल चक्र अपनाते हैं जिसमें पूरा जी... Read more
उत्तराखण्ड के बौद्ध स्थविर
उत्तराखंड का इतिहास भाग – 8 गंगा और रामगंगा तक फैली भाबर की उत्तरी सीमा पर फैली शिवालिक की निचली शाखा का प्राचीन नाम मयूरपर्वत या मोरगिरी था. गंगाजी के पूर्वी तट से चंडीघाट होकर लक्ष्मणझूला... Read more
उत्तराखण्ड की निचली पहाड़ियों में कल दिन भर मौसम की पहली बर्फ़बारी हुई. गढ़वाल मनादल के केदारनाथ, बद्रीनाथ, चौपटा, गंगोत्री, यमुनोत्री, हर्षिल और मसूरी में जबरदस्त बर्फ़बारी हुई है. कुमाओं मंडल... Read more
पूरा पहाड़ हमारा था, मैंने बेच दिया…
पिछली सात तारीख को उत्तराखण्ड विधानसभा का तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र समाप्त हो गया. इस सत्र में उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 (अनुकलन एवं उपरांतरण आदेश 2001) (संश... Read more
मौर्यकाल के दौरान उत्तराखण्ड की स्थिति
उत्तराखंड का इतिहास भाग – 7 मौर्यकाल के साहित्यिक और पुरातत्विक स्त्रोत मिल जाने के कारण वर्त्तमान उत्तराखण्ड क्षेत्र का एक स्पष्ट इतिहास सामने आता है. मौर्यकाल के दौरान वर्तमान उत्तराखण्ड क... Read more
कुली बेगार आन्दोलन से पहले कुमाऊं परिषद
अमृतसर कांग्रेस के बाद के महीने अत्यन्त सक्रियता भरे थे. एक प्रकार से कुमाऊं परिषद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस बीच ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन का असाधारण कार्य किया. जगह जगह परिषद् की शा... Read more
सुन्दरदूँगा ग्लेशियर के रास्ते पर आखिरी दो गांवों में से एक है जातोली. यहाँ जाने के लिए पिंडारी ग्लेशियर के रस्ते पर पड़ने वाले गाँव खाती से 2 किमी पहले एक रास्ता अलग होता है. आगे चलकर पिंडर... Read more
मेरे सपनों का उत्तराखण्ड
गाँव से लौटे महीना नहीं होता कि मैं फ़िर से गाँव की ओर हो लेता हूँ. पहाड़ पर ख़राब मौसम को लेकर मौसम विभाग की तमाम चेतावनियों के बावजूद भी मेरी हर महीने कम से कम एक या दो बार गाँव जाने की काम... Read more
नन्द वंश के अंत में उत्तराखण्ड की भूमिका
उत्तराखंड का इतिहास भाग – 6 भारत के इतिहास में केवल मौर्य, मुग़ल और ब्रिटिश ही अपने स्वर्णिम दिनों में नन्दवंश से बड़ा साम्राज्य स्थापित करने में सफल रहे. महापद्मनंद ऐसा पहला शासक था जिसने इतन... Read more
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