सीएमएस की कुर्सी और सिस्टम का पोस्टमार्टम ?
इन दिनों बागेश्वर जिला अस्पताल भीतर ही भीतर सुलग रहा है. सिस्टम किसी के भी संभालते सँभल नहीं पा रहा है. अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं की देखरेख के लिए ज़रूरी सीएमएस की कुर्सी खाली पड़ी है. कहा ज... Read more
असल पहाड़ी ही जानता है भांग के ऐसे गुण
आज बात हो जाय भांग की और भांग के उस पक्ष की जिसे पहाड़ी आदमी तो बखूबी समझता, जानता है पर मैदानी लोगों के लिए नया है. अक्सर भांग को एक नशा करने वाली चीज ही समझा जाता है. पर भांग तो पहाड़ की ए... Read more
यह लेख भी सन् 1920 में डाँग श्रीनगर निवासी श्री गोविन्दप्रसाद घिल्डियाल, बी.ए. डिप्टी कलेक्टर, उन्नाव द्वारा लिखित और विश्वंभरदत्त चन्दोला द्वारा गढ़वाली प्रेस, देहरादून से प्रकाशित, पुस्तक... Read more
द्वार पूजा का पर्व भी है फूलदेई
उत्तराखण्डियों का बालपर्व – फूलदेई सनातनी संस्कृति में घर का द्वार केवल घर में प्रवेश करने का रास्ता न होकर वन्दनीय पूजनीय माना जाता है. घर बनाते समय द्वार की दिशा का निर्धारण वास्तुशा... Read more
बसंत के इस्तकबाल का त्यौहार है फूलदेई
ऋतुराज बसंत का स्वागत उत्तराखण्ड को देवभूमि के साथ उत्सवों की भी भूमि कहा जाय तो गलत नहीं होगा. यहाँ साल भर उत्सव, पर्व, त्यौहार, मेलों की धूम रहती है. बसंत के आगमन का स्वागत भी उत्तराखण्ड )... Read more
नवरात्र का समय था. हम कुछ दोस्त माँ के दर्शन के लिए गार्जिया मन्दिर गए थे. मन्दिर में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी थी. हम सब भी उस कतार में शामिल हो गये. मौसम सुहाना था. बहुत... Read more
उत्तराखण्ड के कई खिलाडियों ने खेलों की दुनिया में अपना मुकाम बनाया है. हल्द्वानी की प्रियंका भंडारी इसी सिलसिले में एक और नाम है. बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया ने प्रियंका भंडारी को आस्ट्रेलि... Read more
ककड़ी खाने का असल तरीका पहाड़ियों के पास ही हुआ
अब बड़ी ककड़ी के रायते के तो कहने ही क्या. हरी ककड़ी की चोरी भी माफ़ ठेरी. पर तभी तलक जब तक बुड बाड़ों की नज़र चूकी रहे. नन्तर ककड़ी तो गई सो गई ऐसी ऐसी गालियां खाने को मिलें कि पुस्त दर पुस... Read more
नैनीताल का मालिकाना पर्सी बैरन के छल से अंग्रेजों ने नरसिंह थोकदार से हथियाया
सन 1842 में शिकार के शौक़ीन मि. पर्सी बैरन के द्वारा नैनीताल का पता लगा लेने तक यहां पर एक झोपड़ी तक नहीं हुआ करती थी. इस समय नैनीताल झील और इसके आसपास का जंगल थोकदार नरसिंह के अधिकार क्षेत्... Read more
कहते हैं पहाड़ियों का भाग, भागकर ही जागता है
प्रवास अर्थात अपने मुल्क से दूर गैर मुल्क में बस जाना. ये गैर मुल्क अपने देश में भी हो सकता है और विदेश में भी. वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 3 प्रतिशत लोग विदेश में प्रवास... Read more
Popular Posts
- कुमाऊं में रामलीला की परम्परा
- ‘पायर’ फिल्म के सुलगते सवाल…
- हुक्का क्लब अल्मोड़ा की रामलीला से एक्सक्लूसिव तस्वीरें
- ‘पायर’ पहाड़ की ठोस पीठ है
- धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’
- गौरा को किसी से शिकायत नहीं थी
- देवदार या देव दारु
- कसारदेवी : जहां स्वर्ग के सबसे करीब होने का अहसास होता है
- दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व
- पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता
- अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें
- अहा! कैसा होता था नंदादेवी कौतिक
- सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन
- उत्तराखण्ड की महिलाएं : स्थितियों, संघर्षों और चुनौतियों का दस्तावेज
- कामिनी तुम कौन?
- पूर्वी नयार नदी की वो बाढ़
- कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा
- बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार
- आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”
- भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्
- उत्तराखण्ड के सरोवर
- दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध
- सिंधुजा की कविता : स्मृति यात्रा
- पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल
- घी संक्रान्ति का लोक विज्ञान
