अद्वितीय होता है कुमाऊं-गढ़वाल का झोई भात
Posted By: Kafal Treeon:
वो कढ़ती है, ये झोलती है: पहाड़ की झोली 15 साल की उम्र में पहली बार जब गांव में एक महीने से अधिक रहने का सुयोग प्राप्त हुआ तो बोडी ( ताई के लिए गढ़वाली संबोधन) दोपहर के भोजन में रोज झोली यानी... Read more
पहाड़ी मूले का थेचुवा खाइए जनाब, पेटसफा चूरन नहीं
Posted By: Kafal Treeon:
कल सुबह सब्जी लेने मंडी में पहुंचा तो देखा कि पहाड़ी मूला/ मूली बाजार में आ चुका है. अभी बाजार में नया-नया है तो दाम के मामले में खूब इतरा-इठला रहा है. दुकानदार एक रुपया भी कम करने को त... Read more
Popular Posts
- नेपाल के रहस्यमयी झांकरी : योगी, वैद्य, तांत्रिक या ओझा?
- क्या मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रकृति महत्वपूर्ण है?
- क्या हैं जलवायु शरणार्थी?
- सियार और बाघिन: आदर्श पति की कहानी
- क्या चौड़ी सड़कें हिमालय के लिए बेहतर हैं?
- किन हिन्दू ग्रंथों में आता है कैलाश मानसरोवर का जिक्र?
- अधिकांश पहाड़ी जगहों के नाम में वहां का इतिहास और भूगोल छिपा रहता है
- अजपथों से हिमशिखरों तक : हिमालय प्रेमी घुमक्कड़ों के लिए एक जरूरी किताब
- उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस
- उत्तराखंड में मौजूद अशोक के शिलालेख में क्या लिखा है?
- यारसागुंबा ही नहीं यह हिमालयी जड़ भी बनाती है आपको जवान
- उत्तराखंड में सेवा क्षेत्र का विकास व रणनीतियाँ
- जब रुद्रचंद ने अकेले द्वन्द युद्ध जीतकर मुगलों को तराई से भगाया
- कैसे बसी पाटलिपुत्र नगरी
- पुष्पदंत बने वररुचि और सीखे वेद
- चतुर कमला और उसके आलसी पति की कहानी
- माँ! मैं बस लिख देना चाहती हूं- तुम्हारे नाम
- धर्मेन्द्र, मुमताज और उत्तराखंड की ये झील
- घुटनों का दर्द और हिमालय की पुकार
- लिखो कि हिम्मत सिंह के साथ कदम-कदम पर अन्याय हो रहा है !
- पुष्पदन्त और माल्यवान को मिला श्राप
- डुंगरी गरासिया-कवा और कवी: महाप्रलय की कथा
- नेहरू और पहाड़: ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में हिमालय का दर्शन
- साधारण जीवन जीने वाले लोग ही असाधारण उदाहरण बनते हैं : झंझावात
- महान सिदुवा-बिदुवा और खैंट पर्वत की परियाँ
