व्यंग्य के लिये विषय की खोज
आज सुबह-2 फोन पर जो ख़बर मिली उसे सुन कर हम खुशी से फूले न समाये. फोन एक बहुत बड़े पत्रकार-लेखक-विचारक का था, जिन्हें हम अपना गुरु मानते हैं और प्रेम से ‘दादा’ कहते हैं. यदि किसी व्यक्ति को ना... Read more
लोकतंत्र के पहरुवे
गैरीगुरु की पालिटिकल इकानोमी : अथ चुनाव प्रसंग-4 पिछली कड़ी- घोषणा पत्रों में चरम सुख बाजार की उथल-पुथल भरी खबर को खंगालते गली मोहल्ले में बीते महीने से बढ़ गई हलचल को मथते गैरी गुरु का मन लोक... Read more
तूतू – मैंमैं
‘आखिर हुआ क्या?’ ‘होना क्या था? वो हमें बाज़ार में मिले. हमे बहुत जाने-पहचाने से लगे.’ ‘फिर?’ ‘हम भी उन्हें बहुत जाने पहचाने से लगे. वो हमे पहचानने क... Read more
व्यंग्य का जन्म किस प्रकार होता है?
कल एक मित्र का फोन आया. मित्र मुम्बई में हैं, और अभिनय के क्षेत्र में अपना नाम कमा रहे हैं. वैसे तो मित्रों के फोन आते रहते हैं, परन्तु ये फ़ोनकॉल विशेष थी. ये फोनकॉल, मुझ लेखक के लेखन की प्र... Read more
भाई साहब! मैं बाल कवि नहीं हूँ!
उसका वहां होना, जहां उसे नहीं होना चाहिये था, स्वयं में एक घटना थी. सभागृह- प्रेक्षागृह, वाचनालय- पुस्तकालय, विश्वविद्यालय-मदिरालय, ऐसे न जाने कितने आलयों में वह निरन्तर जाता रहा था. कहते है... Read more
खुद को फकीर बताने वाले बड़े साहब
सिंहासन पर आसीन होने के साथ ही अपने को फकीर बताने वाले बड़े साहब ने जनता के सामने वाया सोशल मीडिया यह राय फैला दी कि सिंहासन की रक्षा उनसे ज्यादा अच्छे से कोई नहीं कर सकेगा (दुनिया के श्रेष्ठ... Read more
घोषणा पत्रों में चरम सुख
गैरीगुरु की पालिटिकल इकानोमी : अथ चुनाव प्रसंग-3 पिछली कड़ी- गुलदाढू से सावधान भोंकता कम काटता ज्यादा है शस्य श्यामला धरती में किसानों की मेहनत फल फूल रही हैं. गोठ-भकार-खेत खलिहान अन्न से भरे... Read more
सरकारी विभागों में पावती, सिर्फ पावती नहीं है
उस कक्ष में पांच कर्मचारी उपस्थित थे- तीन पुरुष और दो महिलायें. सभी कुछ देर पहले ही अपने-अपने स्थानों पर आकर बैठे थे. शासकीय भाषा में कहें तो मध्याह्न पूर्व का समय था. कक्ष में -ज़मीन पर, टेब... Read more
कुछ दिनों पहले अचानक हमें अपनी बुद्धि पर फिर से तरस आने लगा. यह कोई नई बात नहीं थी. किसी मनोचिकित्सक की शरण में जाना हमने जरूरी नहीं समझा. असल में साल छह महीने में एक बार ऐसा हो ही जाता है.... Read more
‘सौंदर्य की कविता’ और ‘कविता का सौंदर्य,’ दोनों ही महत्वपूर्ण हैं. परन्तु इन दोनों से भी अधिक महत्वपूर्ण है- सौंदर्य के द्वारा लिखी गई कविता. सौंदर्य के द्वारा लिखी ग... Read more
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