अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 4
गुडी गुडी डेज़ अमित श्रीवास्तव सासति करि पुनि करहि पसाउ | नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाउ || सबकुछ अचानक हुआ था. जैसे गणेश जी दूध पी लिए. जैसे दीवार पर साईं भगवान दिखने लगे. जैसे दुखिया के घर-आँगन... Read more
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 3
पिछली कड़ी गुडी गुडी डेज़ -अमित श्रीवास्तव उन दिनों कोई ख़बर बम की तरह नहीं फूटती थी. सिलिर-सिलिर जलती रहती. बीच-बीच में कोई सूखा समय देख कर झर्रर से लपक उठती फिर धीरे-धीरे राख़ सी बैठ जाती. पून... Read more
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 2
पिछली कड़ी गुडी गुडी डेज़ -अमित श्रीवास्तव बतकुच्चन मामा फैल गए थे. ये बात उनको नागवार गुज़री थी. वैसे तो अपने ख़िलाफ़ चूं भी उनको नागवार गुज़रती थी ये तो चों थी. उन्होंने फनफनाते हुए लौंडों को दे... Read more
गुडी गुडी डेज़ -अमित श्रीवास्तव गुडी गुडी मुहल्ले के शोभा चाचा. नाम शोभनाथ या शोभाकांत जैसा कुछ रहा होगा. हमें यही मिला था बोलने को- शोभा चाचा. महीन, ज़हीन और सत्तर की उमर में भी ताज़ा तरीन दिख... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 15
पहला दखल वो एक नम सुबह थी. ये बताना मुश्किल है कि कल रात की ओस ने देवदार की गहरी हरी छाल और उससे टकराकर निकलती हवाओं में ज्यादा नमी छोड़ी थी या मेरी आँखों में. वो हवा जो पेड़ों के गलियारों से... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 14
मुगले आजम (सलीम-अनारकली एंड वाट इज़ देयर इन नेम) इसकी पटकथा भी वहीं लिखी गयी त्रिशूल के कमरा नंबर पांच की सबसे पीछे वाली पंक्ति में जहां हमारी प्रतिभा जबर्दस्त हिलोरें मारती थी. उस दिन आनंद अ... Read more
नहीं रहे विष्णु खरे
[हिन्दी के वरिष्ठ कवि और प्रतिष्ठित सम्पादक-अनुवादक विष्णु खरे का आज निधन हो गया. अनेक भाषाओं के ज्ञाता और संगीत-सिनेमा के विशेषज्ञ विष्णु जी अपनी तरह के इकलौते साहित्यकार थे जिनकी सोच और र... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 13
बसासत-बसासत विलेज स्टडी टूर के समय एटीआई में इतनी राजनीति हुई जितनी कि शायद सन सैंतालीस के बाद देश भर में नहीं हुई होगी. कारण एक ही था. विलेज टूर असल में अलग-अलग ग्रुप में जाना था और राजनीति... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 12
अधिकारी बन पड़ने की ट्रेनिंग इन सबके साथ जो आश्चर्यजनक चीज़ हुई थी वो ये कि मैं, जो किसी भी दशा में संतुष्ट नहीं रहता था अब लगभग खुश था. अभी भी दूसरे पायदान पर ही था लेकिन खुश था. तीसरे पायदान... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 11
यूपीएससी उपासक की वेदना अभी पंकज सर और देवेन्द्र `चुरू’ मिले कॉरीडोर में. दोनों ऐसे चल रहे थे जैसे कोई वू-डू करके चला रहा हो. वू-डू भी नहीं बल्कि जैसे कल हेमा मैडम बता रही थीं कि यहाँ पहाड़ों... Read more
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