गुर्जी अगर सँभलोगे नहीं तो ऐसे गिर पड़ोगे – हलवाहे राम और लेक्चरार साब की नशीली दास्तान
Posted By: Kafal Treeon:
दोनों में अटूट दोस्ती थी. कुछ ऐसी कि, लंबे समय तक इस दोस्ती ने खूब सुर्खियाँ बटोरी. दोनों के घर आस-पास ही थे. एकदम निकट पड़ोसी समझ लीजिए. उनमें से एक, पूरे गाँव-जवार में सबसे ज्यादा पढ़े-लिख... Read more
परीक्षा माने – ‘पर इच्छा’
Posted By: Girish Lohanion:
दो दोस्त थे. दोनों में काफी घनिष्ठता थी. दाँत काटी दोस्ती समझ लीजिए. ये बात, इस नजरिए से बखूबी साबित होती थी कि, बेहद नाजुक मौकों पर भी दोनों ने हमेशा एक ही जैसे कदम उठाए. मास्टर डिग्री के द... Read more
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