खड़कमाफी के जंगलों और आबादी के बीच पिछले लगभग एक दशक से एक परिचित छाया विचरती रही है—एकदंत गजराज. अब वह इस अंचल की लोककथाओं का जीवंत पात्र बन चुके हैं. उनके एक ही दाँत होने के पीछे भी एक लोक... Read more
पुस्तक समीक्षा – भंवर: एक प्रेम कहानी
भंवर: एक प्रेम कहानी- अनिल रतूड़ी का हाल ही में प्रकाशित उपन्यास है. उपन्यास में लेखक ने लोक-जीवन से भरपूर जितने चित्र और चरित्र उकेरे हैं, कुदरत के चित्र उससे कहीं कमतर नहीं दिखते. लेखक को... Read more
तब यातायात के साधन सुलभ नहीं थे. उस समय इन दुर्गम पर्वतीय तीर्थों की यात्रा करना अति कठिन कार्य था. तो भी बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन तीर्थों के दर्शन करके धर्म-लाभ करते थे तथा पुण्य... Read more
ललित मोहन रयाल का नया उपन्यास ‘चाकरी चतुरंग’
व्यावहारिक- सामाजिक सन्दर्भों में ‘व्यवस्था’ का दृश्य-अदृश्य जितना व्यापक प्रभाव है साहित्यिक-सामाजिक विमर्श में ये उतना ही सामान्यीकृत पद है. इसे लेकर विवेचन के सन्दर्भ बहुत संक... Read more
‘खलंगा’ नेपाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ छावनी या कैंटोनमेंट होता है. अंग्रेज इतिहासकारों ने अपनी भाषिक समझ के हिसाब से इसे किला कहा, जबकि यह एक सुदृढ़ किला नहीं था. युद्ध के ठीक पहले सेना... Read more
मिले सुर मेरा तुम्हारा…
संगीत का जादू सर चढ़कर बोलता है लोक का जादुई प्रभाव होता है. इन कथनों की सच्चाई दूरदर्शन के एक विज्ञापन-गीत के जरिए समझ में आई. तत्कालीन सरकार ने तय किया कि देश को विविधता में एकता विषय पर... Read more
ऊंकू बामण बिर्तिकु काम छाई. कौ-कारज, ब्यौ-बरात, तिरैं-सराद मा खूब दान मिल्दु छाई. बामण भारि लद्दु-गद्दु बोकिक घौर लौटद छा. खटुलि, धोती, आटू, चौंळ, छतुरू. पैंसा दीण म नन्नी मोर जांदि छै. बरतण... Read more
ललित मोहन रयाल ने हिंदी साहित्यिक जगत में अपनी पूर्व प्रकाशित दो पुस्तकों ‘खड़कमाफी की स्मृतियों से’ तथा ‘अथ श्री प्रयागकथा’ के द्वारा एक अद्वितीय स्थान बना लिया है.... Read more
बेईमान भूत और तोतले पंडिज्जी का किस्सा
कई बार भूत बेईमान निकल आता था. पता-ठिकाना पूछने पर गलत-सलत एड्रेस बताने लगता. इधर-उधर की बातें करके चकमा देता. काफी समय तो ये पता करने में ही नष्ट हो जाता था कि ये आखिर है क्या बला. वह बढ़ा... Read more
लोकभाषा में उलटबांसियां
गूढ़ रहस्यों और मर्मस्पर्शी भावों को व्यक्त करने में गढ़वाली बोली कितनी समर्थ है, इसका जायजा लेने की एक छोटी सी कोशिश (Column by Lalit Mohan Rayal) — लोक-भाषा में भावों को व्यक्त करने की बड़... Read more
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