समाज

रवि वल्दिया के मोबाइल से पिथौरागढ़ की जादुई तस्वीरें

बरसात के दिनों धुले हुये पहाड़ अपने नये रंग में दिखते हैं. चटख हरे रंग की हरियाली और ऊंचे पहाड़ों के आगे उमड़ते सफ़ेद बादल हर लम्हें को एक तस्वीर में बदलकर रखते हैं. एक तस्वीर जिसे इंसान सालों तक अपने ज़हन में ताज़ा रख सकता है.
(Photos of Pithoragarh)

पिथौरागढ़ के रहने वाले रवि वल्दिया एक ऐसे फोटोग्राफर हैं जिन्होंने जीवन के लम्हों को अपने कैमरे में कैद किया है. उनके द्वारा ली गयी तस्वीरें कहानियां कहती हैं, हर तस्वीर में कहानी की अनेक संभावनायें होती हैं. फिर चाहे तस्वीर यूरोप के किसी गांव की हो या भारत के किसी गांव की उनकी हर तस्वीर में एक अनकही कहानी दिखती है.

इन दिनों पिथौरागढ़ में रह रहे रवि वल्दिया, मोबाइल फ़ोन के कैमरे से अपना जादू दिखा रहे हैं. उनके द्वारा ली गयी ये तस्वीरें इस बात का उदाहरण हैं कि अच्छी तस्वीर खींचने के लिये आपको महंगे कैमरे से ज्यादा शऊर होना चाहिये चीजों को देखने का शऊर. देखिये रवि वल्दिया के मोबाईल से बरसात में पिथौरागढ़ के रंग :
(Photos of Pithoragarh)

फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया
फोटो : रवि वल्दिया

रवि वल्दिया की फोटोग्राफी आनन्द लेने के लिये उन्होंने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर भी फॉलो किया जा सकता है :

रवि वल्दिया का फेसबुक पेज : Ravi Valdiya Photography

रवि वल्दिया का इंस्टाग्राम अकाउंट : ravi.valdiya

रवि वल्दिया

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

1 week ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

1 week ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

1 week ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

2 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

2 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

2 weeks ago