अशोक पाण्डे

सिर्फ बर्फ से ढकी चोटियां हिमालय नहीं होती

हिमालय की पहली स्मृति नर्सरी क्लास की है जब हमें पिकनिक के लिए अल्मोड़े से कौसानी ले जाया गया था. एक बहुत विशाल हिमपुंज के सामने अवाक हो गए तीन-चार बरस के एक दुबले बच्चे की छवि धुंधली याद की तरह अभी तक बची हुई है. वैसा हिमालय मैंने फिर कभी नहीं देखा.
(Himalaya Day)

नैनीताल में मेरे स्कूल के एक सुदूर कोने से हिमालय दिखाई देता था – स्कूल के नजदीक स्थित स्नो व्यू की तर्ज पर हम इसे छोटा स्नो व्यू कहते थे. मशहूर चित्रकार श्री के. एल. वर्मा हमें पेंटिंग सिखाते थे. उनकी क्लासेज सबसे अच्छी इस मायने में लगती थीं कि हफ्ते में एक बार वे हमें छोटा स्नो व्यू ले जाते थे और हमसे कहते थे – “हिमालय को देखो.” हिमालय अक्सर नहीं दिखता था – कभी वह बादलों के पीछे होता कभी कोहरे के. हम कहते – “हिमालय नहीं दिख रहा सर”. वे मीठी झिड़की देते हुए कहते – “ऐसे बनोगे तुम लोग पेन्टर! तुम जानते हो वह वहां है. आँखें बंद करो और बादलों को हटा कर देखो. वहीं है हिमालय.” इस तरह बारह-तेरह की उम्र में हिमालय को तब भी देखना सीखा जब वह दिखाई नहीं दे.

19 अगस्त 1994 के दिन भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित दारमा घाटी से व्यांस घाटी को जोड़ने वाले बीस हजार फुट ऊंचे सिन-ला दर्रे को पार करते हुए असल हिमालय से सबसे नजदीकी साक्षात्कार हुआ. पंचचूली की चोटियाँ इतने नजदीक थीं कि उनमें अपने चेहरे का अक्स देखा जा सकता था. पिछले छः घंटों से बर्फ में धंसे हुए और बेजान हो चुके हमारे थके हुए पैर किसी तरह आगे बढ़ पा रहे थे. अगर स्वर्ग होता है तो सामने ऐसा नजारा था जिसकी तुलना स्वर्ग से की जा सकती थी! ऐसे में पंचचूली से एक ग्लेशियर टूट कर गिरा. बहरा कर देने वाली ऐसी आवाज मैंने कभी नहीं सुनी. हमारे आसपास कहीं ऊपर से हजारों टन ताजी बर्फ सरसराती हुई नीचे आ रही थी. हम उसकी चपेट में आ भी सकते थे. नहीं भी आ सकते थे. अप्रतिम सुन्दर हिमालय सामने खड़ी मौत भी हो सकता है, पहली दफा जाना. एकाध घंटे बाद किसी तरह दर्रा पार हुआ और आदि कैलाश की गरिमामय चोटी सामने आई तो जाना क्यों हमारे पुराने ग्रन्थ इसे देवतात्मा नगाधिराज कहते हैं. शान्ति का अर्थ भी जाना.
(Himalaya Day)

हिमालय किन-किन चीजों से बनता है – इस सवाल का उत्तर खोजने का शऊर पाने में आधी जिन्दगी लग जाती है. सिर्फ बर्फ से ढंकी चोटियां हिमालय नहीं होतीं. उसके पहले जिन हरे-नीले-सलेटी पहाड़ों की श्रृंखलाएं पसरी दिखाई देती हैं, वे सब भी हिमालय हैं. रात के वक्त इन पहाड़ियों पर दिखाई देने वाली एक-एक रोशनी एक घर होती है जिसके भीतर एक पूरा परिवार अपने मवेशियों, लोकदेवताओं, बच्चों की कहानियों और पुरखों की स्मृतियों के साथ खाना पका कर सोने की तैयारी कर रहा होता है. वे सारी रोशनियाँ हिमालय हैं. उन रोशनियों के स्वप्नों में आने वाले जंगल की हरियाली और बनैले पशु भी उतने ही हिमालय हैं जितना उसके गीतों में तूऊउ-तूऊउ करती रहने वाली चिड़ियाँ.

अगली दफा किसी ऐसे हिल स्टेशन पर जाएं जिसके बारे में आपने सुन रखा हो कि वहां से हिमालय दिखता है और मौसम या धुंध के कारण आप कई-कई दिन तक उसे न देख पाएं तो किसी चिड़िया की आवाज में उसे देखने की कोशिश करें. घास के विशाल गठ्ठर अपने सर पर लादे मद्धम चाल में जंगल से लौट रही किसी कर्मठ पहाड़ी औरत से उसका पता मिलने की पूरी संभावना है. पूछ कर देख सकते हैं. सुनने में आया आज हिमालय दिवस मनाया जा रहा है.
(Himalaya Day)

–अशोक पांडे

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

View Comments

  • यहाँ पर आकर... कुछ पल ठहर के..
    कुछ बहुत अच्छा पढ़ने की..मेरी प्यास बुझ जाती है.
    काफल का हमारा ये 🌳पेड़ सदा हरा भरा रहे..
    हार्दिक शुभकामनाएं.

Recent Posts

दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व

बचपन में हमें होली-दिवाली और राखी के अलावा मकर संक्रांति, घी त्यार और फूलदेई जैसे उत्सवों…

4 days ago

पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता

इस बार करीब 9 साल बाद पिथौरागढ़ जाकर एक बात साफ दिखी कि यहां कुछ…

1 week ago

अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें

आस्था और विश्वास की प्रतीक श्री नंदा देवी की भक्ति में इन दिनों पूरा उत्तराखंड…

2 weeks ago

अहा! कैसा होता था नंदादेवी कौतिक

उत्तराखण्ड के पहाड़ों में मेले केवल मनोरंजन के अवसर नहीं रहे हैं. वे लोकजीवन की…

2 weeks ago

सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन

पिछली कड़ी : बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड की महिलाएं : स्थितियों, संघर्षों और चुनौतियों का दस्तावेज

1970 के दशक का उत्तराखण्ड का ‘चिपको आंदोलन’ विश्वविख्यात है. यह तथ्य भी कमोबेश ज्ञात है कि…

2 weeks ago