Featured

उत्तराखंड में महाभारत कथा से जुड़ी कुछ जरूरी किताबें और शोध

कुमाऊं में प्रचलित महाभारत कथाओं पर शोध अलग-अलग समय और हिस्सों में हुआ है. अब तक डॉ. रामसिंह, पद्मादत्त पन्त और स्मृति शान्ति साह द्वारा कुमाऊं में प्रचलित महाभारत कथाओं पर काम किया गया है. डॉ. रामसिंह ने 1967 में सोर घाटी में गाई जाने वाली भारत गाथा का संकलन किया. इस संकलन के आधार पर पद्मादत्त पन्त ने ‘जागर एक लोक गाथा’ पुस्तक में कथाओं का संक्षिप्त गद्य अवतरण लिखा. डॉ. रामसिंह द्वारा संकलित भारत गाथा केवल सोर घाटी में गाई जाने वाली जागर का संकलन है.  

‘कुमाउनी महाभारत’ नाम से एक पुस्तक स्मृति शान्ति साह द्वारा भी लिखी गयी है. मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय से जॉन लेविट का शोधपत्र ‘अ महाभारता स्टोरी फ्रॉम द कुमाऊं हिल्स’ नाम से प्रकाशित शोध पत्र 1988 में प्रकाशित हुआ. जॉन लेविट ने अपने शोधपत्र में कुमाऊं में महाभारत से जुड़ी दो कथाओं का कुछ जिक्र किया है.

कुमाऊं विश्व विद्यालय के शोधपत्र हैं जो जिला चम्पावत और जिला पिथौरागढ़ से जुड़े हैं उनमें घटोत्कच मंदिर और नकुलेश्वर मंदिर के विषय में जानकारी दी गयी है. अधिकांश शोधपत्रों में दोनों मंदिरों के स्थापत्य से जुड़ी जानकारी दर्ज है.

गढ़वाल में महाभारत से जुड़े साक्ष्यों के लिये सबसे पहले तो प्रोफेसर डी. आर. पुरोहित और मानवशास्त्री William Sax के काम का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिये. एंड्रू आल्टर की किताब Dancing with Devtas इस संबंध में एक अन्य महत्त्वपूर्ण किताब है. डॉ. प्रयाग जोशी का काम भी इसमें पढ़ा जाना चाहिये. गोविन्द चातक, शिव प्रसाद डबराल आदि का अध्ययन करने के साथ सबसे महत्वपूर्ण है स्थानीय लोगों को अध्ययन का हिस्सा बनाना. गढ़वाल के संबंध में अच्छी बात ये है कि यहां आज भी कई गावों ने अपनी लोक परम्पराओं को जीवंत रखा है जरूरत है कि इसपर बड़े शोध हों और विश्व पटल पर हमारी गाथाएं सही तरीके से रखी जायें.    महाभारत से जुड़ी कथा-कहानियों की यह विरासत आधुनिकरण, बढ़ते एकल परिवार और पलायन जैसे अन्य कारणों के चलते विलुप्त होने की कगार पर है.

मौखिक परम्परा के चलते कुमाऊं में महाभारत की यह कथाएं संभवतः अपनी आखिरी पीढ़ियों के पास हैं. अगले कुछ वर्षों में महाभारत से जुड़ी इन कथाओं का विस्तृत अध्ययन और दस्तावेज़ीकरण न किया गया तो कुमाऊं में प्रचलित महाभारत की सभी कथाएं पूरी तरह विलुप्त हो जायेंगी.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन

पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी…

5 days ago

कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा

बड़ी पुरानी बात है. पांडु राजा के पाँच पुत्र थे, पांडव और धृतराष्ट्र के सौ…

3 weeks ago

दिव्य आम का स्वाद जीभ पर नहीं पेट के सबसे चोर हिस्से पर कब्ज़ा जमाता है

हमारे इलाक़े में लंगड़ा आम अमूमन इन्हीं दिनों यानी जून के तीसरे-चौथे हफ़्ते में सलीके…

3 weeks ago

उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी

पिछली कड़ी : एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता हिमालय को जानने समझने व…

1 month ago

एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!

आम तौर पर एक उम्र के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अशक्त, बेबस…

1 month ago

रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन

पहाड़ों में जीवन हमेशा प्रकृति के साथ जुड़कर चला है. यहाँ जंगल सिर्फ पेड़ों का…

1 month ago