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निर्मल पाण्‍डे का सपना था कुमाऊं में रंगमंच का केंद्र खोलना

प्रख्यात कला फ़िल्मों के निर्देशक शेखर कपूर की हिट फिल्म बैंडिट क्वीन में दस्यु सुंदरी फूलन देवी के प्रेमी विक्रम मल्लाह का जोरदार एवं जीवंत किरदार निभाने वाले नैनीताल निवासी अभिनेता निर्मल पांडे की मृत्यु के साथ ही उनका एक सपना अधूरा रह गया था. निर्मल कि मृत्यु के समय पूरे पहाड़ के लोगों और उनके चाहने वालों को गहरा झटका लगा था.

मुंबई में 18 फ़रवरी 2010 को हार्ट अटैक से अचानक काल का ग्रास बने इस बेहद संवेदनशील व भावुक अभिनेता का एक सपना अधूरा रह गया यह सपना था कुमाऊं में रंगमंच का एक केंद्र स्थापित करने का जिसको वह स्वयं सिद्दत के साथ राष्ट्रीय स्तर का बनाने चाहते थे.

भीमताल मल्लीताल की सौ वर्षों से भी पुरानी रामलीला कमेटी से जुड़े विजय बिष्ट बताते हैं कि निर्मल ने 80 के दशक में भीमताल के विकास खंड (ब्लाक) कार्यालय में सरकारी नौकरी करते हुए मल्लीताल रामलीला में महाराजा दशरथ के सेनापति सुमंत का जीवंत किरदार निभाया था, उसका जिक्र आज भी भीमताल के बुज़ुर्ग लोग करते हैं. भले ही उन्होंने एन. एस. डी. में अपनी कला को निखारा हो लेकिन नैसर्गिक रूप से रामलीला के मंच से निकले पांडे चौपाई को गाते अभिनय करते ठेठ राग भैरवी और खम्माज मार्का कलाकार थे.

लोगों ने निर्मल पांडे की फिल्मों इस रात की सुबह नहीं, शिकारी, प्यार किया तो डरना क्या, वन टू का फोर, हम तुम पर मरते हैं, में उनकी जोरदार नेगेटिव रोल को ख़ूब सराहा. उनके जबरदस्त तरीके से लोकप्रिय हुए एकमात्र म्यूजिक वीडियो एल्बम “गब्बर मिक्स” की भी चर्चा खूब रही. इस एल्बम में उन्होंने संगीत में गहरी रुचि के चलते ही अभिनय के साथ गीत भी गाए थे.

यह शायद नाटकों के दौरान हारमोनियम और तबले की साज के रियाज का ही फल था कि निर्मल पांडे ने भले ही ऑफबीट और कमर्शियल दोनों ही तरह की फिल्में की लेकिन उन्होंने रंगमंच को भी कभी नहीं छोड़ा. नाटक और थिएटर में तो मानो उनकी आत्मा बसती थी.

कुमाऊं के एक प्रसिद्ध नृत्य नाटिका भस्मासुर के उनके जला देने वाले अभिनय को आज भी लोग याद करते हैं. नैनीताल में जूहूर आलम द्वारा गठित युगमंच से निकले निर्मल पांडे ने अपनी अभिनय क्षमता का लोहा विदेशी धरती पर भी मनवाया फ्रांस में उन्हें फिल्म दायरा के लिए प्रसशती पत्र मिला जो अपने आप में अनूठा और अतभूत था.

जीते जी पहाड़ की मिट्टी की खुशबू को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा. वह जल जंगल जमीन जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर चिंतित रहते थे क्षेत्रीय हितों के चलते ही उन्होंने उत्तराखंड क्रांति दल के प्रत्याशी पुष्पेश त्रिपाठी का 2004 के उपचुनाव में द्वाराहाट में उन्होंने प्रचार भी किया.

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वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव रौतेला कई मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं.

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Girish Lohani

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  • नैनीताल शहर का रंगमंच के लिए एक विशेष स्थान रहा है 80 के दसक में यहां पर आयोजित होने वाली अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिताओं में उत्तर भारत के हर राज्य से शानदार नाटक लेकर टीमें आती थी ।जब इस शहर में एक अदद प्रेक्षागृह नहीं है तो बाकी छोटे शहरों की कल्पना की जा सकती है।कलाकार किसी पार्टी का वोट बैंक नहीं है जब भी बोलेगा सत्ता के विरोध में ही बोलेगा ।

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