सुरखाब (Ruddyshelduck) फोटो: दीप रजवार
विदेशी प्रवासी पक्षियों के रामनगर पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया है. हर साल सुरखाब, आइविसबिल जैसे कई पक्षी मध्य एशिया और यूरोप के देशों से हजारों किमी का सफर तय कर उत्तराखण्ड आते हैं. कोसी बैराज, हरिपुरा डैम, तुमड़ीया डैम आदि जलाशयों में इन पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू होते ही पर्यटकों, वन्यजीव प्रेमियों, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों के बीच ख़ुशी का माहौल है. प्रवासी पक्षी मार्च तक यहाँ रहेंगे और गरमी बढ़ते ही अपने ठिकानों कि तरफ लौट चलेंगे. इन प्रवासी पक्षियों का अवैध शिकार शासन-प्रशासन के लिए बीते कई सालों से चुनौती बना हुआ है.
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
पिछली कड़ी : कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे का बहुआयामी व्यक्तित्व व कृतित्व : इतिहास से…
उत्तराखंड अपनी निराली संस्कृति के लिए जाना जाता है. यहां के लोक जीवन के कई…
‘‘...हिमालय के दूर-दराज गाँव के अत्यंत विपन्न परिवार में जन्मा एक छात्र नोबेल विजेता भौतिकशास्त्री…
अल्मोड़ा के काफलीखान गांव के रवि टम्टा ने जब अपने बनाए फ्लाइंग व्हीकल "हापिडा स्काईनेक्स"…
उत्तराखंड के पहाड़ों में लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक…
पिछली कड़ी : हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी कुमाऊं को विशिष्ट…