Default

कोरोना से मुकाबले को अल्मोड़ा के हुक्का क्लब में खुला एक अनूठा बैंक

बैंक का नाम जेहन में आते ही पहले रूपये, फिर एटीम दिमाग में आ जाता है. उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में एक नया बैंक खुला है. वो भी कोरोना (कोविट-19) के इस दौर में. श्री लक्ष्मी भंडार ‘हुक्का क्लब’ से संचालित हो रहे इस अनोखे बैंक में भूख से निपटने का इंतजाम है. इस बैंक की एटीएम सेवा भी है, वो भी मोबाइल एटीएम. जो सूचना देने पर आपके घर तक खुद पहुंच जाती है. ये बैंक है जनता का ‘रोटी बैंक’. इस बैंक में सामर्थवान लोग कैश (रूपये) देते हैं उसके बदले उनको मिलती हैं अनगिनत दुआएं. उनके दिए अर्थ से जुट रहा है भूखों का भोजन. इस नेक कार्य का जिम्मा जिन कंधों पर है वो हैं डॉ. अजीत तिवारी. डॉ. तिवारी के निर्देशन में नगर के तमाम जागरूक लोग जुटे हैं जो सुबह होते ही यहां पहुंच जाते हैं और लगातार 14 घंटे यहां डटे रहते हैं. Great Anti-Corona Initiative in Almora Uttarakhand

ऐसे हुई शुरूआत

डॉ. अजीत तिवारी ने बताया कि 22 मार्च को जिलाधिकारी नितिन भदौरिया से रोटी बैंक चलाने को लेकर चर्चा की गई. कई दिनों की मशक्कत के बाद 29 मार्च को रोटी बैंक का श्रीगणेश हुक्का क्लब में हुआ. उन्हें रोटी बैंक का नोडल बना दिया गया. अर्थ जुटाने के लिए जिलाधिकारी ने ‘‘प्रेरणा एक प्रयास’’  नाम से एक खाता बैंक में खुलवाया जिसमें लोग दान दे सकें. 4 से 5 लोगों के साथ आरंभ हुआ इस रोटी बैंक में आज उचित दूरी के मानकों का पालन करते हुए रोज लगभग 150 लोग स्वंय सेवक जुटे रहे हैं. शुरूआत में पांच दिनों में रूपये जुटाने में थोड़ी परेशानी हुई, बाद में लोगों का दान आता गया और मुश्किलें आसान हो गई. आज  बैंक खाते में पर्याप्त  रूपये हैं, जिससे काम आसानी से चल रहा है. Great Anti-Corona Initiative in Almora Uttarakhand

ये है लंच पैक

लंच पैक में सात सौ ग्राम से सवा किलो तक का खाना पैक रहता है. भोजन में दाल, चावल, रोटी, सब्जी  मिलती है. यह मैन्यू प्रतिदिन बदलता है, दाल में राजमा, झोली, छोले, मिक्स दाल, अरहर, मलका. सब्जी में मिक्स वेज, आलू-गोभी, आलू-न्यूट्रीला, लौकी, बैंगन आदि. कई बार खाना खाने वालों की फरमाईश पर भी  खाने में बदलाव किया जाता है. खाना बनाने से पैंकिंग का कार्य विशेष देख-रेख में किया जाता है.

ऐसे बंटता है खाना

जो भी जरूरत मंद हैं वे श्री लक्ष्मी भंडार ‘हुक्का क्लब’ में आकर सूचना दे सकते हैं. उनको उस इलाके के वार्ड मैंबर के द्वारा खाना उनके घर तक  पहुंचाया जाता है, ग्रामीण इलाकों के जो लोग हैं वहां ग्राम प्रधान के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की जा रही है. इसके साथ यहां तमाम स्वयं सेवक हैं जो भूखे परिवारों की पहचान कर उन तक खाना पहुंचाते हैं. पूरा सिस्टम मोबाईल एटीएम की तरह काम कर रहा है. Great Anti-Corona Initiative in Almora Uttarakhand

गुप्त दान भी

डॉ. अजीत तिवारी ने बताया कि जिला अधिकारी ने निर्देशन में संचालित हो रहे बैंक खाते में लोग पैसे जमा कर रहे हैं. यहां पैसे जमा करने वालों को रोटी बैंक वाले तक नहीं जानते. ये ऑनलाइन या खुद बैंक के खातों में रूपये जमा कर रहे हैं. बच्चे यहां आकर अपनी गुल्लक तक दे जाते हैं. कुछ ऐसे हैं जो यहां आ चुपचाप पैसे देते हैं, तो हम उनसे बैंक में पैसा जमा करने को कहते हैं. जो लोग बैंक नहीं जाते तो उनका पैसा स्वयं सेवक खाते में जाकर जमा कर देते हैं. हमारा ये रोटी बैंक लोगों को नेकी का पाठ पढ़ा रहा है.

सोशल मीडिया थोड़ा खट्टा थोड़ा मीठ्ठा

कुछ पेट भरे भुखों को सोशल मीडिया की भूख होती है.  ऐसे भूखे रोटी बैंक वालों को परेशान भी करते हैं. यहां हर दूसरे दिन कुछ ऐसे लोग भी आते हैं जो एक रोटी बेलते हैं और दस फोटो खिंचा के चल देते हैं. कुछ महानुभाव ऐसे हैं की सेल्फी लेने के लिए अपना मास्क भी हटा देते हैं. अपनी इस कारस्तानी को सोशल मीडिया में दिखाते हुए खुद पर इतराते हैं. ऐसे लोगों से काम में व्यवधान पड़ता है. वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया ही इस नेकी के कार्य को आगे भी बढ़ा रहा है.

सभी हुए एक

इस बैंक में किसी को कोई पद नहीं दिया गया है. यहां सभी संप्रदाय के लोग तमाम राजनीतिक दल, पालिका के सभी मैंबर, नगर से लगे ग्रामीण इलाकों के प्रधान  और विभिन्न संगठनों के लोग वैश्विक आपदा में मदद कर रहे हैं. एक साथ, एक स्वर में पूरी दुनिया को एकता का पाठ पढ़ा रहे हैं. कुल मिलाकर यहां आने वाले सभी स्वयंवेक हैं. जो समाज को बेहतर दिशा देने के लिए लिए जुटे हैं.

उत्तर प्रदेश में भी खुले बैंक

अल्मोड़ा के रोटी बैंक की चर्चा पूरे देश में है. मीडिया के माध्यम से जब लोगों को पता चला तो उन्होंने अपने नगर में भी रोटी बैंक खोल दिए. डॉ. तिवारी ने बताया कि सीमांत जिला पिथौरागढ़, चंपावत में ये बैंक चल निकले हैं. अल्मोड़ा आकाशवाणी से भी रिपोर्ट प्रसारित हुई. उसके बाद मुरादाबाद, नजीबाबाद, बरेली, बिजनौर के साथ उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों से फोन आए. उन्होंने अब अपने-अपने इलाकों में रोटी बैंक खोल दिए हैं. Great Anti-Corona Initiative in Almora Uttarakhand 

कोई भी भूखा नहीं सोएगा

“अल्मोड़ा में कोई भूखा नहीं सोएगा” – इसी संकल्प के साथ रोटी बैंक कार्य कर रहा है. जब तक लाकडाउन रहेगा तब तक ये बैंक कार्य करता रहेगा.  यदि लाकडाउन खुलता है तो उसके बाद भी जरूरतमंदों को भोजन की व्यवस्था की जाएगी.

अल्मोड़ा के इस रोटी बैंक पर मजरुह सुल्तानपुरी की ये पंक्तियां सटीक बैठती है-

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर 
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

-दिग्विजय बिष्ट

यह भी पढ़ें: जनकवि गिर्दा को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया

काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online

दिग्विजय बिष्ट ने पत्रकारिता की शुरूआत टीवी 100 रानीखेत से की. न्यूज 24, डीडी न्यूज होते हुए कई इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में उन्होंने काम किया. बाद में अमर उजाला के बरेली संस्करण के न्यूज डेस्क पर काम. दिल्ली मीडिया में साल भर काम किया. वर्तमान में आल इण्डिया रेडियो, आकाशवाणी अल्मोड़ा से जुड़े हैं.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

View Comments

  • बहुत ही सराहनीय काम है में जिलाध्यक्ष और तिवारी जी के साथ साथ जितने लोग भी इसमें शामिल हैं उन सभी लोगों को प्रणाम करता हूं । आप इसमें बैंक डिटेल भी दे सकते हैं कोई गुप्त दान करना चाहे तो कर सकता है ।

  • कृपया बैंक विवरण दीजिए ताकि दूर दराज बसे उत्तराखंडी अपना सहयोग दे सकै ।

Recent Posts

उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी

पिछली कड़ी : एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता हिमालय को जानने समझने व…

6 days ago

एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!

आम तौर पर एक उम्र के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अशक्त, बेबस…

6 days ago

रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन

पहाड़ों में जीवन हमेशा प्रकृति के साथ जुड़कर चला है. यहाँ जंगल सिर्फ पेड़ों का…

7 days ago

हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी

इस तस्वीर में आपको दिख रहे हैं "पंडित नैन सिंह रावत" — 19वीं सदी के उन महान…

4 weeks ago

भारतीय परम्परा और धरती मां

हमारी भारतीय परंपरा में धरती को हमेशा से ही मां कह कर पुकारा गया है. ‘माता…

4 weeks ago

एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता

तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के…

1 month ago