दून पुस्तकालय एवम् शोध केन्द्र की ओर से महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर विश्व के विभिन्न देशों के द्वारा गांधी जी पर जारी किये गये डाक टिकटों तथा उन पर आधारित कार्टूनों की प्रदर्शनी का शुभांरभ शनिवार, 21 सितम्बर, 2019 को इन्द्रलोक होटल राजपुर रोड में किया जा रहा है. इस प्रदर्शनी में विभिन्न देशों द्वारा उन पर जारी तकरीबन 400 डाक टिकट तथा 50 के करीब कार्टून शामिल हैं.
महात्मा गांधी आधुनिक युग के उन दुर्लभ व्यक्तियों में से एक हैं, जिनके विचारों का प्रभाव भारत से बाहर के देशों में भी पढ़ा. उनके प्रशंसक और अनुयायी पूरी दुनिया में थे. उनके विश्वव्यापी प्रभाव का आंकलन इसी बात से किया जा सकता है कि विश्व के अधिकतर देशों ने उन पर डाक टिकट जारी किये हैं और तमाम देशों के प्रकाशनों में उनके कार्टून दिखायी देते हैं. जाहिर तौर पर गांधी पर कार्टून बनाना हर कार्टूनिस्ट के लिए खुशी की बात रही है.
इस विषय को केन्द्रित करते हुए गांधी जी की 150वीं जयन्ती के अवसर पर दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र द्वारा विभिन्न देशों के कार्टूनों एवं डाक टिकटों की प्रर्दशनी का आयोजन किया जा रहा है जो उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव श्री सुरजीत के. दास के निजी संग्रह से हैं. मूल कार्टूनों को बड़े आकार में प्रतिकृति करने का कार्य स्थानीय कलाकार श्री अब्दुल खली़क ने किया हैं.
उद्घाटन के उपरान्त यह प्रदर्शनी 12 अक्टूबर, 2019 तक आम जनता के लिए खुली रहेगी. शहर की आम जनता महात्मा गांधी पर जारी किये गये इन डाक टिकटों और उन पर आधारित कार्टूनों के दुर्लभ और दिलचस्प संग्रह को होटल इन्द्रलोक की आर्ट गैलरी में देख सकती है.
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से दी गयी सूचना पर आधारित
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
यह दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत तस्वीर है. इस से पहले मैंने ऐसी तस्वीर नहीं देखी,…
डीएनए, आनुवंशिकी और मानवशास्त्र की दृष्टि से एक वैज्ञानिक समीक्षा भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में यदि…
माला नाम था उसका. छरहरी काया, बला की ख़ूबसूरत. लेडीज साइकिल से जब कॉलेज आती,…
उत्तराखण्ड का अधिकांश भूभाग हिमालय की पर्वतीय श्रृंखलाओं में स्थित है, जहाँ तीव्र ढाल, गहरी नदी घाटियाँ, युवा…
पनार बुग्याल के ऊपरी छोर वाले रास्ते पर अब हम चल रहे हैं. पनार चोटी…
पिछली कड़ी : कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल सन 1928 में अल्मोड़ा…