चालक बनढ़ाडु की कहानी- कुमाऊनी लोककथा
एकबार एक चालाक बनढ़ाडु दूध के बर्तन में मुंडी डालकर दूध पी रहा था. अचानक घर के मालिक के आने की आवाज़ सुनकर बनढ़ाडु ने हड़बड़ी में मुंडी बाहर निकालनी चाही पर वह तो बर्तन के अंदर ही फस गयी थी.... Read more
तीन साल पहले सहधर्मिणी व बच्चों को अपना मकोट और बच्चों का बुड़ मकोट दिखाकर लाया था. आज फिर मन में अचानक मकोट की पुरानी यादें आ गई तो चला गया. हिनौला बाजार से लगभग एक किलोमीटर के पैदल रास्ते... Read more
इन दिनों उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में होने वाले घोटालों का भूत नाच रहा है. आज इस विभाग में कल इस विभाग में. 22 सालों में उत्तराखंड ने यह पाया है कि अब शायद ही कोई विभाग बचा हो जहां भर्त... Read more
एक डोटयाल के लड़के की कहानी- कुमाऊनी लोककथा
बहुत कम उम्र में ही एक डोटयाल का लड़का नेपाल से भागकर कुमाऊं के किसी गांव में आ बसा. गांव वाले उसे कांछा कहने लगे. पहले-पहल तो गांव वालों ने उसकी कम उम्र देखकर ऐसा कोई काम न दिया. फिर एक दिन... Read more
सवाल: पहाड़ी और पेपर घोटाला
वैसे हम पहाड़ी हमेशा ही ठगे गए. जब हम उत्तर प्रदेश में थे, उस वक़्त अलग राज्य बनने के लिए हमने मार खाई. हमारी मां-बहनों से बेइज्जती की गई. कई लोगों की जान चली गई. उस वक़्त कई तरह की उम्मीदे... Read more
कहानी पंचकेदार की
उत्तराखण्ड को देवभूमि भी कहा जाता है. यहाँ उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बने मंदिर देश-विदेश के करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं. इन्हीं मंदिरों में शामिल हैं पञ्च केदार. जैसा की नाम से ही... Read more
कुमाऊं की एक लोककथा- प्यार करने वाली लड़की
एक गांव में एक मां और बेटा रहते थे. मां बेचारी अपने लड़के की बेवकूफियों से बड़ी परेशान थी. एक दिन बेटे ने अपनी मां से कहा- मां मैं किसी लड़की से कैसे प्यार करूं. मां बेचारी पहले तो हंसी और क... Read more
राज्य सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर उत्तराखंड महिलाओं का एकाधिकार समाप्त
उत्तराखंड राज्य की सेवाओं में महिलाओं को मिलने वाले 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का अधिकार समाप्त हो चुका है. उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा जारी एक फैसले के बाद अब तक केवल उत्तराखंड की महिलाओं क... Read more
पहाड़ में भू-कानून के पेंच
उत्तराखंड में भू-कानून की विसंगतियों को दूर करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन “भू सम्पदा विनियमन एवं विकास नियमावली” से संबंधित है. भूमि के जटिल मामलों को सुलझाने के लिए समिति... Read more
14 जनवरी, 1921 का वो ऐतिहासिक दिन था जब बागेश्वर में उत्तरायणी पर्व के अवसर पर कुली बेगार को खत्म करने की शुरुआत हुई. सरयू और गोमती के संगम पर इस आन्दोलन का उदघोष हुआ. तब तत्कालीन जिलाधिकारी... Read more


























