कुमाऊनी जागर शैली में शिव सती विवाह की कहानी
1937 में जन्मे मार्क गैबेरिओ दर्शन, अरब और इस्लाम पर अपने अध्ययन के लिये जाने जाते हैं. 1963 में मार्क नेपाल में आये. नेपाल में 1967 तक उन्होंने फ्रेंच भाषा पढ़ाने का काम किया. नेपाल में रहन... Read more
मेघ व हिमालय चित्रावली
पोखरा नेपाल से मुस्तांग जाते बादलों की अठखेलियों में मगन हिमालय की दृश्यावलियाँ : –प्रोफेसर मृगेश पाण्डे जीवन भर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल महाविद्यालयों में अर्थशास्त्र की प्राध्यापकी... Read more
आलू, चने और रायते का यह अनुपम जादू
तश्तरी के ऊपरी हिस्से में जो काले चने दिखाई दे रहे हैं उन्हें रात भर चीड़ की लकड़ी की आँच में गलाया जाता है. बिल्कुल बेसिक मसालों में भूने गए आलू हमारे कुमाऊँ में गुटके कहलाते हैं. इन दोनों... Read more
कुमाऊँ में वस्त्र उद्योग का इतिहास
ऐसा प्रतीत होता है कि कुटीर उद्योग के रूप में वस्त्र निर्माण समूचे हिमालयी क्षेत्र में विद्यमान था. प्रत्येक गाँव में कृषक अपने गाय-बैलों के साथ भेड़ भी पालते थे, जिनके ऊन से कंबल व वस्त्र ब... Read more
मेरी आवाज़ सुनो…
पहाड़ की कराह निकली… वह बोला मैं टूट रहा हूँ, बचा लो मुझे! मैं धंस रहा हूँ, देखो संभालो मुझे! उसके तन-मन से जुड़े नदी, चट्टानों, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, कीट-पतंगों में उथल-पुथल मची... Read more
उत्तराखंड की जागर गाथाएं
पहाड़ में आण-काथ-लोक गाथाओं का अक्षय भंडार हुआ जिनके असंख्य किस्से आमा-बुबू के मुँह से नानतिनों तक पहुँच सुनहरी यादों को रचा-बसा देने वाले हुए. उस पर शारीरिक चेष्टाओं के द्वारा प्रकट भाव के... Read more
(यह संस्मरण मेरे दादाजी (स्व. मथुरादत्त शर्मा), दादी (स्व. माधवी देवी), और परदादी, जिन्हें अम्मा कहा गया है, (स्व. दुर्गा देवी) की 1960 में बद्रीनाथ धाम की पैदल तीर्थ यात्रा पर उनसे सुने गए... Read more
करीब छह-सात वर्ष पहले जब कुमाऊं मंडल विकास निगम का बेहतरीन प्रकाशन ‘थ्रोन ऑफ गॉड्स’ (धीरज सिंह गर्ब्याल और अशोक पाण्डे) हाथ में आया था तब उसके पाठ की बजाय उसमें प्रकाशित अत्यंत सुंदर-कलात्मक... Read more
बीते दिन सोर घाटी के 22 गावों के लोग सड़कों पर थे. हाथों में निशान लिये ढोल दमाऊ के साथ निकले लोग अपने लोक देवता के डोले के लिए रास्ता मांग रहे हैं जिसे पिथौरागढ़ स्थित मिलिट्री इंजीनियर सर्... Read more
गोल्ड मैडल जीतने वाली मानसी नेगी का दर्द
इसमें शायद ही दोराय हो कि पहाड़ का कठोर जीवन पहाड़ के बच्चों को शारीरिक तौर पर मैदानी बच्चों से बेहतर बनाता है. प्रकृति की गोद में पले-बड़े बच्चों को जब मौका मिलता है वह साबित करते हैं कि के... Read more


























