काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree पश्चिम के अनेक लेखकों ने कुमाऊं में रहने वाले लोगों के लिये जिस एक शब्द का खूब प्रयोग किया है वह है – अन्धविश्वासी. ह... Read more
धान पधान मडुआ राजा ग्यूं गुलाम
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree भारत सरकार की एक योजना है अन्न श्री. यह योजना मोटे अनाज की पैदावार को बढ़ावा देने से संबंधित है. मालूम हो की भारत, दु... Read more
कल हरेला है
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree मानो जैसे कल की ही बात होगी जब परदेश में पोस्टमैन अपने झोले से चिट्ठी निकाल कर देता. सरकारी मोहर के साथ लगे हल्के टीक... Read more
1987 में देश की राजधानी में छोलिया नृत्य – वीडियो
यह साल 1987 के फरवरी माह की 19 तारीख़ को रिकार्ड किया गया वीडियो है. यह वीडियो एक कुमाऊनी नाटक का हिस्सा है. नाटक का नाम था ऋतुरैण. ऋतुरैण नाटक का यह मंचन देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था. आ... Read more
कूर्मांचल की साहित्यिक परम्परा
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree भारत की संस्कृति में हिमालय का महत्वपूर्ण स्थान है. कालिदास साहित्य में हिमालय देवताओं की आत्मा और सत्यं शिवम् सुंदरम... Read more
हरेला किस दिन बोया जाना है
उत्तराखंड के पहाड़ी समाज द्वारा मनाये जाने वाले लोकपर्वों में सबसे महत्वपूर्ण लोकपर्व में एक है हरेला. प्रकृति से जुड़ा यह लोकपर्व है साल में तीन बार मनाया जाता है. आने वाली 17 तारीख़ को इस... Read more
लैंसडाउन पर 1987 में प्रकाशित एक दिलचस्प लेख
उत्तर रेलवे के कोटद्वार स्टेशन से 42 कि०मी० पुरातन शहर दुगड्डा से 27 कि०मी० उत्तर में 136 पुरानी छावनी युक्त एक छोटा किन्तु सुन्दर नगर लेन्सडौन लगभग 1780 मी० की ऊंचाई पर बसा है. लैन्सडोन का... Read more
बीते माह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काफल भेंट किये गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार... Read more
1942 में साइकिल रिक्शा की शुरूआत हुई नैनीताल में
लगभग दो वर्ष पूर्व नैनीताल नगर में ई-रिक्शा की जब शुरूआत हुई तो स्थानीय लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिला, वहीं अब माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में जब नैनीताल की... Read more
साल 1929 में गांधीजी अपनी पर्वतीय यात्रा पर थे. दो दिन ताड़ीखेत में रहने के बाद अल्मोड़ा अगला पड़ाव था. अल्मोड़ा में स्थानीय म्युनिसिपलिटी की ओर से गांधीजी को एक मानपत्र दिया गया. हिन्दी में... Read more


























