मैदान में मौज करते नेता पहाड़ में मांगते हैं वोट
विषम भौगोलिक परिस्थिति वाला राज्य. आज भी जहां आवागमन के सीमित संसाधन हैं. इसमें भी अधिकांश कच्ची व टूटी सड़कें हैं. पेयजल की आधी-अधूरी व्यवस्था है. रोजगार का कोई जरिया नहीं है. सीढ़ीनुमा खेतों... Read more
पहाड़ और मेरा बचपन – 3
पिछली क़िस्त पहाड़ और मेरा बचपन – 2 मां आस-पास की ऐसी औरतों को जानती थी, जिन्होंने खुद भी गाय पाली हुई थीं. ये सभी महिलाएं आपस में मिलकर घास का कोई पहाड़ खरीद लेतीं और फिर मिलकर घास काटने जात... Read more
माफ़ करना हे पिता – 6
(पिछली क़िस्त: माफ़ करना हे पिता – 5) एक रोज सीढ़ियों से लुढ़क कर मैं अपना माथा फुड़वा बैठा. लोगों ने घाव में चीनी चरस ठूँस कर कपड़ा बाँध दिया. कुछ दिन बाद घाव पक कर रिसने लगा, उसमें मवा... Read more
मध्यकालीन गढ़वाल राजनीति का चाणक्य भाग – 1
मध्यकालीन गढ़वाल की राजनीति जिसे गढ़ नरेशों के युग से भी जाना जाता है, में कुछ असाधारण व्यक्तियों ने अपनी विलक्षण प्रतिमा से इतिहास में स्थान बनाया है. इनमें पूरिया नैथाणी का नाम विशेष रूप से... Read more
रहस्यमयी झील रूपकुंड तक की पैदल यात्रा – 6
(पिछली क़िस्त का लिंक – रहस्यमयी झील रूपकुंड तक की पैदल यात्रा – 5) सुबह 4 बजे उठी और सबसे पहले बाहर देखा. आसमान अभी भी खुला है इसलिये तसल्ली हो रही है कि ट्रेक अच्छे से हो जायेगा... Read more
सहज लोकबुद्धि और शारीरिक पराक्रम की कथा है चंदायन
लुरखुर लोरिक -चन्द्र भूषण चंडीगढ़ के आर्ट म्यूजियम में लौर-चंदा सीरीज की 14 फोलियो पेंटिंगें मौजूद हैं. 16वीं सदी में बनी चटख रंगों वाली इस कथा-आधारित अद्भुत चित्र श्रृंखला के बहुत सारे चित्... Read more
धौली और नन्दा की कथा
कार्तिग के महीने गांव के ऊपर नीचे की सारियां फसल काटने के बाद खाली हो जाती. आसमान बरसात के बाद गहरा नीला ये स्यो (सेब) जैसे बड़े बड़े तारों से अछप रहता. हम सब बच्चे चौड़ी फटालों वाले आँगन में अ... Read more
कोयल उस ऋतु को बचा रही है
चेन्नई में कोयल -आलोक धन्वा चेन्नई में कोयल बोल रही है जबकि मई का महीना आया हुआ है समुद्र के किनारे बसे इस शहर में कोयल बोल रही है अपनी बोली क्या हिंदी और क्या तमिल उतने ही मीठे बोल जैसे अवध... Read more
परीक्षा माने – ‘पर इच्छा’
दो दोस्त थे. दोनों में काफी घनिष्ठता थी. दाँत काटी दोस्ती समझ लीजिए. ये बात, इस नजरिए से बखूबी साबित होती थी कि, बेहद नाजुक मौकों पर भी दोनों ने हमेशा एक ही जैसे कदम उठाए. मास्टर डिग्री के द... Read more
जिस दौर में टी.वी.चैनलों का मतलब ही शोर और हुल्लड़बाज़ी हो गया हो, ‘गुफ़्तगू’ के 300 एपीसोड पूरा होना एक घटना है. राज्यसभा चैनल का यह इंटरव्यू शो सिर्फ़ भारत नहीं, ग्लोब के दूसरे हिस्सों में... Read more


























