सियार और सूरज
अफ्रीकी लोक-कथाएँ: 4 बहुत पुरानी बात है जब आदमी जानवर थे और जानवर आदमी, एक सियार अपने बूढ़े पिता के साथ रहता था. एक दिन बूढ़े ने अपने बेटे से कहा: “सुनो बेटा, तुमने अपने लिए जल्द ही एक दुल्ह... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 4
पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से लगातार रचनाएं करते थे. वे नैनीताल के प्रतिष्ठित विद्यालय बिड़ला विद्या मंदिर में... Read more
चीन का अपना चांद
हमारे देश में स्ट्रीट लाईट में बल्ब नहीं हैं चीन अपने लिये चांद बनाने जा रहा है. न केवल बनाने जा रहा है बल्कि 2020 तक आसमान में आर्टिफिशयल चांद लगाने की तैयारी में है. वो भी एक नहीं तीन. मतल... Read more
जोहार घाटी का सफ़र भाग – 8
पिछली कड़ी मौसम को करवट बदलते देख वापस हो लिए. मर्तोली गांव की गलियों में भटकने लगे. जिन गलियों में कभी बच्चे चहकते होंगे वो गलियां सूनसान सोयी हुवी सी महसूस हुवी. 200 मवासों का गांव आज सूनसा... Read more
सतत सोन पापड़ी यात्रा प्रतिबंधित
सरकार जल्द ही सोन पापड़ी मिठाई संबंधी एक अध्यादेश जारी करने वाली है. अध्यादेश के मुताबिक दिवाली से ठीक तीन दिन पहले रात आठ बजे रिश्तेदारी के घरों की सतत यात्रा पर निकली सोन पापड़ी अब रिश्तेदार... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने – 21
यदि आज किसी विधायक को आबकारी मंत्री बना दिया जाए तो उसका बेडा पार. मंत्री हो जाने की बात तो दूर की, यदि किसी दमदार विधायक को शराब का ठेकेदार विरोध में खड़े होने वालों को खरीदने की जिम्मेदारी... Read more
वे मगहर में नहीं अपने घर में मर रहे हैं
हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ – 3 अस्सी के दशक में समकालीन कविता में जिन महत्वपूर्ण कवियों ने पहचान बनायी उसमें हरीश चन्द्र पाण्डे का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है. समकालीन हिन्दी कव... Read more
कुमाऊं की पारंपरिक चित्रकला ऐपण
दीवाली का त्यौहार नजदीक ही है. इस त्यौहार में कुमाऊ के सभी घरों को ऐपण से सजाया जायेगा. ऐपण एक पारंपरिक कुमाऊनी चित्रकला है. इस लोक चित्रकला का सभी स्थानीय धार्मिक अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण... Read more
गुस्सा करना कौन चाहता है, मगर…
भाई साहब हर रोज सुबह-सुबह तय करते हैं कि चाहे कैसे भी हालात हों, वे आज गुस्सा नहीं करेंगे. नेताओं और कामयाब बाबाओं की तरह मंद-मंद मुस्कराते रहेंगे, लेकिन हर रोज उन्हें ऐसे लोग टकरा जाते या क... Read more
लिखता हूँ ख़त खून से स्याही न समझना
ख़तो-किताबत -शंभू राणा क़ासिद के आते-आते ख़त एक और लिख रखूं, मैं जानता हूँ, जो वो लिखेंगे जवाब में ख़तो-किताबत के प्रति ऐसी बेताबी अब देखने में नहीं आती. ज्यादा वक्त नहीं गुज़रा जब ख़तो-किताबत आम... Read more


























