पहाड़ और मेरा जीवन – 24 (पोस्ट को लेखक सुन्दर चंद ठाकुर की आवाज में सुनने के लिये प्लेयर के लोड होने की प्रतीक्षा करें.) जिसने पहाड़ में रहकर कभी चूल्हे में तांबे के गुड़तोलों में बना भात-दा... Read more
रितुरैण या ऋतुरैण (Riturain) गीतों का उत्तराखण्ड की लोक परम्पराओं में महत्वपूर्ण स्थान रहा है. इन्हें बसंत ऋतु और विशेषकर चैत्र महीने में गाया जाता है. चैत्र के महीने में गाये जाने के कारण इ... Read more
11 अप्रैल को होंगे उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव
जैसी कि लम्बे समय से उम्मीद की जा रही थी लोकसभा चुनाव 2019 होना तय हो गया है. आज दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तय तारीखों की आधिकारिक घोषणा की है. सात चरणों में ह... Read more
लाई वी न गई ते निभाई वी न गई
अंतर देस इ (… शेष कुशल है!) मामला जम नहीं रहा था. तीन दिन से लगातार पिच्चर हॉल जा रहा हूँ. पूरी मूवी नहीं बस वो राष्ट्रगान वाले टाइम रहकर फिर बाहर आ जाता हूँ. देशभक्ति नहीं आई मुझमें. अभी कल... Read more
कितना कम जानते हैं हम तिब्बत के बारे में
तिब्बत विद्रोह दिवस आज दस मार्च है. (Tibetan Uprising Day 2019) मैं यह इस लिए याद दिला रहा हूँ कि आज यानी के दिन दुनिया भर में रह रहे शरणार्थी तिब्बती तिब्बत विद्रोह दिवस मनाते हैं. वर्ष 195... Read more
वासु चटर्जी की फिल्म: चमेली की शादी
कुछ फिल्में दर्शकों को आज भी बेहद रोमांचित करती हैं. इस तथ्य पर गहनता से विचार करें कि, ऐसा क्यों होता है. क्यों यह फिल्म सोंधी सी लगती है? एक मोहल्ले की कॉमन सी प्रेम-कथा, किन तत्त्वों को ल... Read more
शकुनाखर: मांगलिक अवसरों पर गाये जाने वाले गीत
शकुनाखर (Shakunakhar) उत्तराखण्ड (Uttarakhand) के कुमाऊँ मंडल में किसी भी शुभ कार्य की शरुआत से पहले गाये जाने वाले गीत हैं. शकुन का अर्थ है शगुन और आखर मतलब अक्षर. इस तरह यह नाम शगुन के मौक... Read more
फिरंगी जुल्म सहने की प्रैक्टिस के लिए जब अल्मोड़े के युवक अपने घावों में नमक भरवाते थे
अल्मोड़े में कांग्रेस का जन्म 1921 में हुआ. इससे पहले जब 1905 में बंग भंग आन्दोलन का प्रारम्भ हुआ, उससे कुछ बच्चों और नवयुवकों के सुकुमार मन में अंग्रेजी राज के प्रति घृणा के भाव उत्पन्न हो... Read more
पिथौरागढ़ का ‘महाराजा के’ पार्क
महाराजा पार्क का नाम वॉर मेमोरियल पार्क महाराजा के पार्क, पिथौरागढ़ में नब्बे के दशक में जन्मे बच्चों की मीठी याद का एक जरुरी हिस्सा हमेशा रहेगा. पिथौरागढ़ शहर से लगभग 4 किमी की दूरी पर बने इस... Read more
काफल ट्री के नियमित सहयोगी चंद्रशेखर तिवारी ने ‘उत्तराखण्ड होली के लोक रंग’ नाम से एक महत्वपूर्ण पुस्तक का सम्पादन किया है. समय साक्ष्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का प्रार... Read more


























