जब अंग्रेज ने ताऊजी को कुमाऊनी में दिया झटका
हम उन्हें ताऊजी कहते थे परंतु हमारी इजा की दीदी के श्रीमान होने के नाते दिल्ली की देसी भाषा में वे हमारे मौसा जी होते. ताऊजी का व्यक्तित्व कमाल का था. जो भी उनसे मिलता, उनका मुरीद हो जाता. क... Read more
भोटान्तिक अर्थव्यवस्था और हूण देश से व्यापार
इतिहास के पुराने पन्नों में गंगा के मैदानों से हिमालय की गगनचुम्बी उपत्यकाओं की ओर अपने पशुओं के साथ बढ़ती भिल्ल किरात जाति के प्रवेश की गाथा है. पशुचारकों का जीवन जीते प्रकृति के सान्निध्य... Read more
कल पत्थरों के महान पारखी और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के पद्मभूषण से सम्मानित भूगर्भ विज्ञानी डा. खड्ग सिंह वल्दिया साढ़े त्रिरासी वर्ष की उम्र में इस धरती से विदा हो गए. उनका जीवन संघर्ष और कुछ... Read more
डॉक्टर बनने का सपना देखने वाला पहाड़ी बच्चा दुनिया का प्रख्यात भू-वैज्ञानिक बन गया: प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया को श्रद्धांजलि
आज ही के दिन हिमालय पुत्र प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का जन्म बर्मा के कलौ नगर में हुआ था और आज ही के दिन बैंगलोर शहर में उनकी मृत्यु हो गयी. भले आधिकारिक कागजों में उनका जन्मदिन 20 मार्च हो पर... Read more
रोने वाली बुढ़िया की कहानी से जानिये जीवन में सकारात्मक नजरिए से क्या फर्क पड़ता है
हमारे जीवन में कैसी स्थितियां हैं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, पर उनके प्रति हमारे नजरिए से बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है. कई बार यह नजरिया हमारी खुशी और कई बार दुख की वजह बनता है. ऐसा भी संभव... Read more
बेईमान भूत और तोतले पंडिज्जी का किस्सा
कई बार भूत बेईमान निकल आता था. पता-ठिकाना पूछने पर गलत-सलत एड्रेस बताने लगता. इधर-उधर की बातें करके चकमा देता. काफी समय तो ये पता करने में ही नष्ट हो जाता था कि ये आखिर है क्या बला. वह बढ़ा... Read more
एक छोटा बालक था. उसकी दादी उसे रोज एक रोटी उसके ज्योज्याग (कमरबन्द) में बांधकर उसे भेड़ चराने भेजती थी. एक दिन भेड़ चराने से पहले उसने अपनी रोटी एक झाड़ी में छिपा दी. वापस आया तो झाड़ी से रो... Read more
उत्तराखंड के लोक में अमर प्रेम गाथाएं
उत्तराखण्ड के इतिहास में यदि हम समाज को देखना शुरू करते हैं तो पाते हैं कि वर्तमान भेदभाव पूर्ण नितियां या वर्तमान जाति व्यवस्था का आंकड़ा यही कोई 4-5 सौ सालों पहले फिट बैठाया गया होगा. वीर... Read more
जिक्र भवाली चौराहे का आता है, तो कई यादें दिलो-दिमाग पर तैरने लगती हैं. भवाली का इतिहास, आजादी के पूर्व स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका, स्वातंत्रोत्तर भारत में इसके विकास की दशा एवं दिशा... Read more
डियर एसपीबी,आई जस्ट कॉल्ड टू से आई लव यू. आवाज़ बहुत भारी थी वो. बहुत ही भारी. तमाम आवाज़ों के बीच जगह बनाकर भीतर जम गई. यूं कि जैसे आलती-पालथी मारे बैठ ही गई हो. बहुत मशक्कत से उठाने से भी... Read more


























