सालों पुराना नुस्खा: छोटा कैनवास
“साहिबान, गाड़ी आपकी चलने वाली है. आपका ध्यान चाहूँगा. बस दो मिनट लूँगा आपका.साहब, कई बार कविता सुनते हैं, उसको पचा नहीं पाते. खुद की कविता लिखने की इच्छा होती है, जिससे अपच बढ़ जाती है. क्र... Read more
प्राचीनकाल से ही उत्तराराखण्ड का सम्बन्ध रामभक्ति परम्परा से रहा है. डॉ0 शिवप्रसाद नैथानी के कथनानुसार – श्रीराम कथा के आदि महाकाव्य वाल्मीकि रामायण में, इस प्रदेश को लक्ष्मण के पुत्रो... Read more
गढ़वाल में रामलीला के मंचन का इतिहास
रामलीला पर्वतीय प्रदेश उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों में आयोजित की जाती रही है, जिनमें सर्वप्रथम अल्मोड़ा कुमांउनी रामलीला की जन्मस्थली रही है. अल्मोड़ा में 1860 में दन्या के बद्रीदत्त जोशी... Read more
भारत में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार
भारत में अब महिलाओं पर अत्याचार, हिंसा और शोषण जैसी अमानवीय घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. पूरे देश में महिलाएं हर जगह, हर समय, हर क्षण, हर परिस्थिति में हिंसा के किसी भी रूप का शिकार हो रह... Read more
तिब्बत व्यापार की अनोखी प्रणालियां और बंदोबस्त
तिब्बत में भोटान्तिकों का व्यापार वहां की अनेकानेक मंडियों में होता था. इनमें मुख्य तकलाकोट, ज्ञानिमा, गरतोक, चकरा, शिवचिलम, ख्युंग लिङ्ग, दरचेन, कुंलिङ्ग, थुलिङ्ग, पुंलिङ्ग, नावरा, लामा छोर... Read more
यूं ही चलते रहो, बस थोड़ा और, थोड़ा-सा और
जिंदगी का नाम संघर्ष है. जब तक हम जिंदा हैं, हमें संघर्ष करते रहना होगा. सिर्फ मृत व्यक्ति को कोई संघर्ष नहीं करना पड़ता. इसीलिए दूसरों को कभी जज न करें. एक मुस्कराते चेहरे के पीछे कितनी पीड... Read more
बेहाल हैं उत्तराखण्ड के छोटे किसान
देश की अर्थव्यवस्था में जीडीपी का सर्वाधिक प्रतिशत कमाने वाली कृषि को लेकर जहां एक तरफ देशभर में राजनीति चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ छोटी-छोटी जोतों के मालिक यानि छोटे स्तर के करोड़ो किसान परे... Read more
गढ़वाले मा बाघ लागो,बाघ की डरा… ब्याखूली ए जये घर चैय्ला, अज्याल बाघ की भै डर… गढ़वाल का लोकगीत हो या कुमाऊं की लोकोक्ति दोनों ही बराबर रूप से उत्तराखंड के समाज में बाघ की उपस्थिति उसके भय औ... Read more
शैलेश मटियानी की जन्मतिथि पर भावपूर्ण स्मरण
दुख ही जीवन की कथा रहीक्या कहूँ आज जो नहीं कही निराला जी की ये पंक्तियाँ जितनी हिंदी काव्य के महाप्राण निराला के जीवन को उद्घाटित करती हैं उतनी ही हमारे कथा साहित्य में अप्रतिम स्थान रखने वा... Read more
उत्तराखंड की वनराजी जनजाति पर जमीनी रपट
उत्तराखंड की पांच जनजातियों थारू, बोक्सा, भोटिया, जौनसारी और वनराजी में संभवतः सबसे पिछड़ी और कम जनसंख्या वाली जनजाति है वनराजी. यह जनजाति उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित पिथौरागढ़... Read more


























