स्वाधीनता संग्राम में गढ़वाल का चंपारण ककोड़ाखाल: कुली बेगार विरोधी आंदोलन के सौ साल
1857 की क्रांति में गढ़वाल भू-भाग में पूरी तरह शांति रही. इतनी कि तत्कालीन कमिश्नर रैमजे को गढ़वाल भ्रमण पर होने के बावजूद नैनीताल पहुँचना ही श्रेयस्कर लगा. उसी गढ़वाल में अंग्रे राज्य के वि... Read more
गहरी सांस लेने के 12 अद्भुत फायदे
हमारे शरीर में प्राणतत्व के होने की बुनियादी वजह हमारा सांस लेना है. जब तक हम सांस ले रहे हैं तब तक शरीर में प्राणतत्व बना रहता है. सांस लेना बंद करते ही प्राण तत्व भी शरीर से निकल जाता है.... Read more
चन्द्र सिंह राही: पहाड़ के एक अभिभावक की पुण्यतिथि
मंच से वह कभी पहाड़ी बोलने का आग्रह नहीं करते थे बल्कि आदेश के साथ कहते अपुण पहाड़ी में बुल्लान औन चें. जब कोई युवा अपनी बोली में उनसे बात करता तो उनके चेहरे की चमक देखने लायक होती फिर चाहे... Read more
घाम-पानी की युवा टीम से एक्सक्लूसिव बातचीत
पिछले दिनों चांदनी एंटरप्राइजेज के यूट्यूब चैनल पर घाम-पानी गीत रिलीज हुआ. गीत का वीडियो और संगीत खूब सराहा जा रहा है यूट्यूब पर 60 हज़ार से ज्यादा लोग गीत को देख चुके हैं. गीत में अपनी तरह... Read more
नजर लगने से बचाने के लिये आमा-बूबू के टोने टोटके
जिसने मेरे लाल को नजर लगायी उसकी आँखें जल कर छार हो जाईं. रसोई में जलती बांज कुकाट की लकड़ियों के दहकते क्वेलों को पण्यू से टीप बड़े तवे में डाल आमा गुस्से में फनफनाई. बदजात काणी च्याव! म्या... Read more
पहाड़ की कहानी : हरिया हरफनमौला
दुकान वाले मोहन दा के हाथ से चाय का गिलास थामते हुए पद्मा दत्त लोहनी ने अपनी कुर्सी दूसरी ओर को सरका ली. अपनी आदत से मजबूर पास की कुर्सी में बैठा हरिया हँसते हुए बोल पड़ा –“गुरू जी इतनी भ... Read more
इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली के राजपथ में होने वाली परेड में उत्तराखण्ड की झांकी भी दिखाई देगी. रक्षा मंत्रालय ने इस साल की गणतंत्र दिवस परेड के लिए 17 राज्यों की झांकियों का चयन कि... Read more
एक मरा हुआ मनुष्य इस समय जीवित मनुष्य की तुलना में ज़्यादा कह रहा है: मंगलेश डबराल की याद में
मैं जब भी यथार्थ का पीछा करता हूं देखता हूं वह भी मेरा पीछा कर रहा है मुझसे तेज़ भाग रहा है. उस रोज़ कौन जानता था कि वो नये सफ़र पर निकलने वाले थे. ये न घर का रास्ता था न कोई आवाज़ थी न कोई... Read more
पहाड़ी से उतरती एक कच्ची सड़क ने हमें फ़ेस्टिवल के वेन्यू पर लाकर छोड़ दिया. किसामा नाम के इस विरासती गाँव की रौनक़ देखने वाली थी. एक पहाड़ी पर बनी सीमेंटेंड पगडंडी के इर्द-गिर्द बांस से बनी... Read more
काली कुमाऊं के वीर भ्यूंराज की मार्मिक कथा
घटना कुमाऊं के अंतिम चंद राजा मोहन चंद के काल (सन् 1777 से 1788 ई.) की है. इस समय कुमाऊं पूर्णतया जर्जर और छिन्न-भिन्न हो चुका था. इस अन्तिम राजा बनने की लालसा वाले शासक ने कुमाऊं के बिछिन्न... Read more


























