जागो प्यारे : अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
उठो लाल अब आँखे खोलोपानी लाई हूँ मुँह धो लो (Jago Pyare) बीती रात कमल दल फूलेउनके ऊपर भंवरे झूले चिड़िया चहक उठी पेड़ परबहने लगी हवा अति सुंदर नभ में न्यारी लाली छाईधरती ने प्यारी छवि पाई भो... Read more
‘बिद्दू अंकल’ शैलेश मटियानी की प्रतिनिधि कहानी
लोग हमें गाँव में भी ‘बिद्दू’ ही पुकारते थे, दिल्ली शहर तो दिल्ली ही हुआ. यहाँ गाँव भनौरा, तहसील पट्टी, जिला-प्रतापगढ़, यू०पी० के न सिर्फ ये कि गरीब, बल्कि करीबन अनाथ गवई लरिका क... Read more
महंगाई की मार पर एक पुराना कुमाऊनी लोकगीत
कुमाऊं और गढ़वाल के क्षेत्र में समसमसामायिक मुद्दों पर गीत कहने और सुनाने की बड़ी पुरानी परम्परा रही है. यहाँ होने वाले मेलों में इस तरह के गीत गाते लोग अक्सर देखने को मिल जाते थे. अब यह परम... Read more
दुनिया का पहला उपन्यास एक ऐसी औरत ने लिखा था जिसका असली नाम तक हम नहीं जानते
आज से हजार साल पहले का जापान उल्लेखनीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण से गुज़र रहा था. आर्थिक सम्पन्नता के उस दौर में, ख़ास तौर पर स्त्रियों के विकसित सौन्दर्यबोध को उनका नैतिक गुण माना जाता था. सुन्... Read more
पहाड़ ने भी खूब संवारा लखनऊ का चेहरा
किसी भी नगर की सबसे पहली पहचान उसकी नागरिक सुविधाओं से बनती है. लखनऊ अब एक बड़ा महानगर है. सन 1947 में यह छोटा-सा नगर था. इसका प्रबंध नगर पालिका करती थी जिसकी आर्थिक हालत बड़ी खस्ता थी. कुछ... Read more
लोककथा : तपस्या का फल
विरेन आज घर से बाजार के लिये यह कहकर निकला था कि वह पूरा सामान खरीद कर लायेगा. एक दुकान से दूसरी दुकान, दूसरी से तीसरी और फिर चौथी. पत्नी भी साथ में थी. बेटा चौदह साल का हो गया था, उसका यज्ञ... Read more
पुरुषों के वर्चस्व वाले परम्परागत पेशे को अपनाने वाली सोमेश्वर की ‘गीता’ की कहानी
हम अक्सर बात करते हैं कि महिलायें आज पुरुषों से कम नहीं हैं. आज महिलाओं ने हर जगह अपनी पैठ बना ली है चाहे वह अभियांत्रिकी का क्षेत्र हो, चिकित्सा का या फिर राजनीति, सेना या शिक्षा. पर हम कभी... Read more
पहले श्राद्ध का गांव में विशेष इन्तजार रहता था . सोलह सरादों में सभी घरों में सराद होता है और गांव में लगभग हर घर में एक समान भोजन बनता है. चौमास का समय हो तो गांव घरों में साग-सब्जी आदि प्र... Read more
लोककथा : जिद्दी औरत
एक गांव में एक औरत रहती थी. वह एक विरोधी स्वभाव व बहुत ईर्ष्यालु प्रवृत्ति की थी. कोई उसे कुछ भी सलाह दे वह उसका ठीक उल्टा करती. भले ही उसे कितना भी समझाया जाए, वह कितना ही नुकसान उठाये, परन... Read more
चोरी करना बुरी बात है पर यह बात ककड़ी चोरी पर भी लागू हो, कहा नहीं जा सकता. इसलिये तो हमारे पहाड़ में कहा जाता है, ककड़ी चोरी करने वाले को किसी भी प्रकार की गालियां नहीं लगती हैं. पहाड़ में... Read more


























