कुमाऊं की रामलीला का विस्तृत इतिहास
सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई इलाकों में अनेक पर्व और उत्सव मनाये जाते हैं. लोक और धर्म से जुड़े इन उत्सवों की आस्था समाज के साथ बहुत ग... Read more
टकाना रामलीला का प्रारम्भ से अब तक का सफर व मंचन बहुत ही सुन्दर, सराहनीय और लोकप्रिय रहा है. हमेशा अपने-अपने किरदार में सभी पात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर जनता को आनंदित किया है. टकाना रामली... Read more
कुमाऊं की रामलीला पर ‘गिर्दा’ का एक महत्वपूर्ण लेख
कुमाऊॅं (उत्तराखण्ड) में प्रचलित रामलीला सम्भवतः संसार का एक मात्र ऐसा गीत नाट्य है जो ग्यारह दिनों तक लगातार क्रमशः चलता है और जिसमें कई-कई बार बाजार का पूरा एक हिस्सा-पूरा इलाका ही मंच बन... Read more
बात 1470 के आस-पास की है, दश्त-ए-किप्चाक (तुर्किस्तान) में राजनीतिक उथल-पुथल चल रही थी. हाल ही में दश्त-ए-किप्चाक ने अपना शासक खोया था और नये अनुभवहीन शासक बुरुज औघलान ने गद्दी संभाली थी. मं... Read more
सोर घाटी के बाशिंदों का सबसे पसंदीदा डॉक्टर
लंबी सधी हुयी ऊँगलियों के बीच चाईनीज इंक पेन से सादे सफेद पर्चे में मरीज को समझता और समझाता एक चेहरा. लंबी सी नाक और बालों में उतना ही तेल लगा हुआ, जिससे कि वो अपनी जगह में बने रहें. लम्बे ख... Read more
लोककथा : मेंढक राजकुमार
ऊँचे पहाड़ों की चोटी पर एक गरीब दम्पत्ति रहते थे. अपने ढलवां खेतों पर फसल बोकर वे किसी तरह गुजारा करते. पहाड़ी के निचले ढलानों पर उन दोनों मेहनती पति-पत्नी ने अपने खेत बनाये हुए थे. (Folklor... Read more
दीप रजवार देश के चर्चित वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स में से हैं. 10 सालों से जिम कॉर्बेट पार्क की जैव विविधता को कैमरे में कैद करते आ रहे दीप ने रामनगर में एक वाइल्डलाइफ आर्ट गैलरी की शुरुआत की ह... Read more
कवि के साथ बातचीत का सलीका शिवप्रसाद जोशी के संग्रह ‘रिक्त स्थान और अन्य कविताएँ’ पढ़ने के बाद इस लेख की शुरुआत करते हुए शीर्षक को लेकर अनेक शब्द दिमाग में कोंधते रहे, मगर हर बार शब्द ज़बान... Read more
उत्तराखंड में भूमि प्रबंधन व राज्य को चलाने के लिए आगम के प्रमाण कत्यूरी राजाओं के समय से मिलते हैं. कत्यूरी नरेशों के काल में खेतीबाड़ी, जंगलात और खनन आगम प्राप्ति के मुख्य स्त्रोत थे. खेत... Read more
उत्तराखण्ड की लोककथा : अजुआ बफौल
जमाने पुरानी बात है. पंच देवता का मन हुआ कि हिमालय की यात्रा की जाये. सो पंचदेव पर्वतराज हिमालय की यात्रा पर चल पड़े. हिमालय के सम्मोहन में बंधे वे लगातार चलते ही जा रहे थे. जब वे थक गए तो व... Read more


























