अमेरीकी टीवी कार्यक्रम गेम ऑफ़ थ्रोंस दुनिया के शबे लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों में शुमार है. जॉर्ज आर मार्टिन की किताब पर आधारित यह टीवी कार्यक्रम भारतीय युवाओं के बीच भी गेम ऑफ थ्रोन्स ख़ासा... Read more
वन्य जीव विहार का खुलना और धन सिंह राणा की वसीयत
धन सिंह राणा याद आ गए. चमोली जिले के लाता गांव वाले सीधे साधे से आम पहाड़ी. 1974 में बिरला राजकीय महाविद्यालय में अर्थशास्त्र का शिक्षक होने के बाद वहां ऐसे कुछ चेले मिले जो हर छुट्टी में अप... Read more
पहाड़ी इस्कूली छोरों के चोरी के किस्से
बचपन गांव में बीते और कभी चोरी नहीं की हो ये हो नहीं सकता. पहाड़ में प्राकृतिक चीजों की चोरी से इस्कूली छ्वोरों को कोई गुरेज नहीं रहता. लड़के आलू के गुटके बनाना हो तो आलू चोरी, ककड़ी, नींबू,... Read more
परम पूज्य श्री नारायण स्वामी जी ने उत्तराखण्ड के सीमान्त क्षेत्र के सर्वांगीण उत्थान का बीड़ा तब उठाया था जब भारत माता परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ी कराह रही थी. सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ तब... Read more
देश के इतिहास में पहली बार एक हज़ार से अधिक लड़कियों ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानि एनडीए की परीक्षा पास कर अपने जज़्बे और हुनर को साबित कर दिया है. उन्होंने यह संदेश भी दे दिया कि यदि अवसर... Read more
चम्पावत में सामान्य वर्ग के छात्रों का दलित भोजन माता के हाथों बना मिड डे मील खाने से इनकार
हाल ही में उत्तराखण्ड का चम्पावत जिला एक दलित टेलर की पीट-पीट कर हत्या किये जाने के मामले में चर्चित रहा था. देवीधुरा के गाँव केदारनाथ में रमेश राम की हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में मृतक क... Read more
‘कुमाऊँ का होली गायन : लोक एवं शास्त्र’ के लेखक डॉ पंकज उप्रेती से बातचीत
देवभूमि उत्तराखंड के हर क्षेत्र में डेढ़ सौ साल से भी अधिक समय से शास्त्रीय संगीत पर आधारित बैठकी होली गायन की परंपरा से चली आ रही है. यहां शीतकाल के पौष मास के प्रथम रविवार से गणपति की वंदन... Read more
भिखारी राजा और दयालु युवक: एक प्रेरक कथा
एक बार की बात है प्राचीन भारत के एक राज्य में एक बहुत नेकदिल राजा राज करता था. उस राजा की कोई संतान न थी जिसे कि वह अपना उत्तराधिकारी बनाता. राजा बूढ़ा होता जा रहा था. वह एक सुयोग्य उत्तराधि... Read more
ललित मोहन रयाल का नया उपन्यास ‘चाकरी चतुरंग’
व्यावहारिक- सामाजिक सन्दर्भों में ‘व्यवस्था’ का दृश्य-अदृश्य जितना व्यापक प्रभाव है साहित्यिक-सामाजिक विमर्श में ये उतना ही सामान्यीकृत पद है. इसे लेकर विवेचन के सन्दर्भ बहुत संक... Read more
‘पूस की रात’ दर्द और दोस्ती की कहानी
हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे. मुन्नी झाड़ू लगा रही थी. पीछे फिरकर बोली- तीन ही तो रुपये हैं, दे दोगे तो कम्मल कहाँ से आवेग... Read more


























